नवीनतम लेख

तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे(Tera Kisne Kiya Shringar Sanware)

तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे,

तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवरे ।

तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे,

तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवरे ।

मस्तक पर मलियागिरी चन्दन,

केसर तिलक लगाया ।


मोर मुकुट कानो में कुण्डल,

इत्र खूब बरसाया ।

महकता रहे यह दरबार सांवरे,

तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे ॥


बागो से कलियाँ चुन चुन कर,

सुन्दर हार बनाया ।

रहे सलामत हाथ सदा वो,

जिसने तुझे सजाया ।

सजाता रहे वो हर बार सांवरे

तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे ॥


बोल सांवरे बोल तुम्हे मैं,

कौन सा भजन सुनाऊँ ।

ऐसा कोई राग बतादे,

तू नाचे मैं गाऊं ।

नचाता रहूँ मैं, हर बार सांवरे,

तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे ॥


तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे,

तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवरे ।

तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे,

तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवरे ।

बृहस्पतिवार की पूजा विधि

हिंदू धर्म में बृहस्पतिवार का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन बृहस्पति देव, जो कि ज्ञान, शिक्षा, और बौद्धिकता के देवता हैं, को समर्पित होता है।

सुनले ओ मेरी मैया, मुझे तेरा ही सहारा (Sunle O Meri Maiya Mujhe Tera Hi Sahara)

सुनले ओ मेरी मैया,
मुझे तेरा ही सहारा,

सारे जग में विराजे रे, मेरे शिव भोले( Sare Jag Mein Viraje Re Mere Shiv Bhole)

सारे जग में विराजे रे,
मेरे शिव भोले,

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी (Jyeshth Maas Ki Shukla Paksh Ki Nirjala Ekaadashi)

एक समय महर्षि वेद व्यास जी महाराज युधिष्ठिर के यहाँ संयोग से पहुँच गये। महाराजा युधिष्ठिर ने उनका समुचित आदर किया, अर्घ्य और पाद्य देकर सुन्दर आसन पर बिठाया, षोडशोपचार पूर्वक उनकी पूजा की।

यह भी जाने