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तेरे बिना श्याम, हमारा नहीं कोई रे(Tere Bina Shyam Hamara Nahi Koi Re)

तेरे बिना श्याम,

हमारा नहीं कोई रे,

हमारा नहीं कोई रे,

सहारा नहीं कोई रे,

तेरें बिना श्याम,

हमारा नहीं कोई रे ॥


अमुवा की डाली पे

पिंजरा टंगाया,

उड गया सूवा,

पढ़ाया नहीं कोई रे,

तेरें बिना श्याम,

हमारा नहीं कोई रे ॥


गहरी गहरी नदियाँ,

नाव पुरानी,

डूबण लागी नाव,

बचाया नहीं कोई रे,

तेरें बिना श्याम,

हमारा नहीं कोई रे ॥


भाई और बंधू,

कुटुम्ब कबीलो,

बिगड़ी जो बात,

बनाया नहीं कोई रे,

तेरें बिना श्याम,

हमारा नहीं कोई रे ॥


कहत कबीर,

सुनो भाई साधो,

गुरु बिन ज्ञान,

सिखाया नहीं कोई रे,

तेरें बिना श्याम,

हमारा नहीं कोई रे ॥


तेरे बिना श्याम,

हमारा नहीं कोई रे,

हमारा नहीं कोई रे,

सहारा नहीं कोई रे,

तेरें बिना श्याम,

हमारा नहीं कोई रे ॥

ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अपरा नामक एकादशी (Jyesth Mas Ke Krishna Paksh Ki Apara Namak Ekaadshi)

इतनी कथा सुनने के बाद महाराज युधिष्ठिर ने पुनः भगवान् कृष्ण से हाथ जोड़कर कहा-हे मधुसूदन । अब आप कृपा कर मुझ ज्येष्ठ मास कृष्ण एकादशी का नाम और मोहात्म्य सुनाइये क्योंकि मेरी उसको सुनने की महान् अच्छा है।

हर हर शंभू - शिव भजन (Har Har Shambhu)

हर हर शंभू (शंभू) शंभू (शंभू) शिव महादेवा
शंभू शंभू शंभू शंभू शिव महादेव

भरी उनकी आँखों में है, कितनी करुणा (Bhari Unki Ankho Mein Hai Kitni Karuna)

भरी उनकी आँखों में है, कितनी करुणा
जाकर सुदामा भिखारी से पूछो

सबके दिल में, श्याम की तस्वीर है (Sabke Dil Mein, Shyam Ki Tasveer Hai)

सबके दिल में,
श्याम की तस्वीर है,

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