हे सरस्वती माँ ज्ञान की देवी किरपा करो(Hey Saraswati Maa Gyan Ki Devi Kirpa Karo)

हे सरस्वती माँ ज्ञान की देवी किरपा करो

देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो

करुनामई है तू वरदानी कमल तेरे कर साजे है

आनंद मंगल कर देती है जिस घर मात विराजे है,

ज्ञान से तेरे सरस्वती माँ अँध्यारो का नाश हुआ

समृधि आई उस घर माँ जिस घर तेरा वास हुआ

अपनी महिमा से घर मेरा खुशियों से भरो

देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो


सात सुरों की देवी हो तुम सात सुरों में वास तेरा

सरगम से गूंजे ये धरती सरगम से आकाश तेरा

तेरी किरपा से सरस्वती माँ मंगल सब हो जाता है

जिसके कंठ विराजे माता बिगड़ा भग्य बन जाता है

मेरे भी सारे काज मात तूम पूरण करो

देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो


वीणा धारनी विपदा हारनी कितनी पावन हो माता

देव ऋषि तुम्हे नमन करे माँ दर्शन तेरा मन भाता

गुनी जनों की हो हित कारी सब को शरण लगाती हु

जिसकी वाणी में बस जाओ माला माल बनाती हो

हम दीं हीन पे मात मेरी तुम ध्यान धरो

देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो

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उलझ मत दिल बहारो में 2 (Ulajh Mat Dil Bharo Me -2)

उलझ मत दिल बहारो में बहारो का भरोसा क्या,
सहारे छुट जाते है सहरो का बरोसा क्या

होली भाई दूज की कथा

सनातन धर्म में भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए कई उत्सव मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक है होली भाई दूज, जिसे "यम द्वितीया" भी कहा जाता है।

सवारी महाकाल की आई(Sawari Mahakal Ki Aayi)

आओ प्यारे भक्तों,
भोले बाबा को मनाएं हम,

माता चंडी की पूजा विधि

मां चंडी जो विशेष रूप से शक्ति, दुर्गा और पार्वती के रूप में पूजी जाती हैं। उनका रूप रौद्र और उग्र होता है, और वे शत्रुओं का नाश करने वाली, बुराई का विनाश करने वाली और संसार को शांति देने वाली देवी के रूप में पूजा जाती हैं।

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