मत बरसो इन्दर राज (Mat Barso Inder Raj)

अजी मत बरसो इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे,

या जग सेठाणी भीजे,

म्हारी राज राणी भीजे,

अजी मत बरसों इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥


गुम्बज पर मेवा बरसे,

मंदिर पर मेवा बरसे,

अजी पौढ़ी पर अमृत धार,

मोटी सेठाणी भीजे,

अजी मत बरसों इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥


सावन की रुत मतवाली,

झूले में झूंझण वाली,

अरे सह पावे ना बौछार,

या जग सेठाणी भीजे,

अजी मत बरसों इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥


झूंझण से खबरिया आई,

सब चलो लोग लुगाई,

ले चलो छतर हजार,

या जग सेठाणी भीजे,

अजी मत बरसों इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥


पानी के मैया बहाने,

इन्दर आयो दर्शन पाने,

जया मेरो धन्य हुयो परिवार,

दादी चरणा ने छूके,

अजी मत बरसों इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥


अजी मत बरसो इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे,

या जग सेठाणी भीजे,

म्हारी राज राणी भीजे,

अजी मत बरसो इन्दर राज,

या जग सेठाणी भीजे ॥

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राम नवमी सुहानी मन भावनी, राम जी को संग लेके आई(Ram Navmi Suhani Manbhavni Ram Ji Ko Sang Leke Aayi)

राम नवमी सुहानी मन भावनी,
राम जी को संग लेके आई,

मासिक कार्तिगाई पूजा विधि

सनातन हिंदू धर्म में, कार्तिगाई का विशेष महत्व है। यह पर्व दक्षिण भारत में अधिक प्रचलित है। इस दिन लोग अपने घरों और आस-पास दीपक जलाते हैं।

हरि जी! मेरी लागी लगन मत तोडना (Hari Ji Meri Lagi Lagan Mat Todna)

हरि जी! मेरी लागी लगन मत तोडना,
लाला* जी! मेरी लागी लगन मत तोडना,

कार्तिगाई दीपम उत्सव से जुड़ी पौराणिक कथा

कार्तिगाई दीपम उत्सव दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो भगवान कार्तिकेय और शिव को समर्पित है। यह उत्सव तमिल माह कार्तिगाई की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो उत्तर भारतीय कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि को आयोजित होता है।

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