महाराज विनायक आओ: भजन (Maharaj Vinayak Aao)

गणराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


रणत भवन से आवो नी गजानन,

संग में रिद्धि सिद्धि ल्यावो,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


गणराज विनायक आवो,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


ब्रम्हा जी आवो देवा विष्णु पधारो,

संग में सरस्वती ले आवो,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


गणराज विनायक आवो,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


नांदिये सवारी शिव भोला पधारो,

संग में पार्वती ने ल्यावो,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


गणराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


सिंघ सवारी नवदुर्गे पधारो,

संग में काळा गौरा ल्यावो,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


गणराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


लीले सवारी बाबा रामदेव आवो,

संग में मेतल राणी ल्यावो,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


गणराज विनायक आवो,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


तानसेन देवा थारो यश गावे,

भूल्या ने राह बतावो,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥


गणराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ,

महाराज विनायक आओ,

म्हारी सभा में रंग बरसाओ ॥

........................................................................................................
भानु सप्तमी का व्रत क्यों रखा जाता है

हर माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर यदि रविवार होता है, तो उस दिन भानु सप्तमी मनाई जाती है। मार्गशीर्ष मास में ये विशेष संयोग 08 दिसंबर, रविवार को बन रहा है।

मेरा बजरंगी हनुमान, बड़ा ही अलबेला है (Mera Bajrangi Hanuman Bada Albela Hai)

मेरा बजरंगी हनुमान,
बड़ा ही अलबेला है,

करवा चौथ की पूजा विधि

करवा चौथ का व्रत उत्तर भारत की महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाया जाता है।

भगवान अय्यप्पा की पूजा कैसे करें?

भगवान अय्यप्पा हिंदू धर्म के एक प्रमुख देवता हैं, जो विशेष रूप से केरल राज्य में पूजे जाते हैं। वे विष्णु और शिव के संयुक्त रूप माने जाते हैं। अय्यप्पा के बारे में कई कथाएं हैं, जो विभिन्न पौराणिक ग्रंथों और धार्मिक कथाओं में बताई जाती हैं।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।