मार्गशीर्ष की अशुभ तिथियां

मार्गशीर्ष माह में इन तिथियों में ना करें कोई भी शुभ काम, जानें कारण 


सनातन धर्म में प्रत्येक माह का अपना विशेष महत्व होता है और हर महीना किसी ना किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। मार्गशीर्ष का माह जिसे हिंदी में अगहन और अंग्रेजी में दिसंबर कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है। यह माह भक्ति, पवित्रता और शुभ कार्यों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस दौरान कुछ तिथियां ऐसी भी होती हैं। जिन्हें अशुभ माना गया है। इन तिथियों पर शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। क्योंकि, ऐसा करने से वंश और धन का नाश हो सकता है।


मार्गशीर्ष माह का महत्व


हिंदू धर्म के अनुसार मार्गशीर्ष का महीना भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। श्रीमद्भागवत गीता में स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है। "मासानां मार्गशीर्षोऽहम्।" अर्थात, "मैं सभी महीनों में मार्गशीर्ष हूं।" यह माह भक्ति और पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान तामसिक भोजन जैसे मांसाहार और मदिरा का सेवन वर्जित है। इस महीने भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।


मार्गशीर्ष माह की तिथियां और पंचांग


पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह की शुरुआत 16 नवंबर 2024 से हो चुकी है। इस पूरे महीने में भक्तगण भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न उपाय और पूजा-अनुष्ठान करते हैं। हालांकि, इस महीने में कुछ तिथियां अशुभ मानी जाती हैं।


मार्गशीर्ष माह की अशुभ तिथियां


ज्योतिषाचार्य नीरज भारद्वाज के अनुसार मार्गशीर्ष माह में अष्टमी और सप्तमी तिथियां अशुभ मानी जाती हैं। इन तिथियों को "शून्य तृतीय" कहा जाता है। इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। इन तिथियों में मंगल कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश या अन्य शुभ काम करने से वंश और धन का नाश होने की संभावना रहती है।


मार्गशीर्ष माह में करें ये कार्य


इस पवित्र माह में भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु की पूजा करना विशेष लाभदायक माना जाता है। इस दौरान निम्नलिखित कार्य अवश्य करें। 


  1. श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करें: प्रतिदिन गीता का पाठ करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।
  2. पवित्र नदी में स्नान: गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है। स्नान के दौरान तुलसी के पत्तों और मिट्टी का उपयोग करना शुभ होता है।
  3. दान-पुण्य करें: गरीब और असहाय लोगों को भोजन, वस्त्र, और धन का दान करें। यह पुण्य लाभ प्रदान करता है और कष्टों से मुक्ति दिलाता है।
  4. भगवान के मंत्रों का जाप करें: भगवान श्रीकृष्ण के निम्न मंत्रों का जाप करें: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। ॐ नमो नारायणाय।
  5. संध्याकाल में भजन-कीर्तन: शाम के समय भगवान कृष्ण और राधा की पूजा करें और विष्णु जी के भजन-कीर्तन का आयोजन करें।


मार्गशीर्ष माह में ना करें ये कार्य


  1. मांसाहार और मदिरा का सेवन: इस पवित्र माह में मांसाहारी भोजन, मदिरा, और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन पूरी तरह से वर्जित है।
  2. जीरा का उपयोग ना करें: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह में जीरा खाना शुभ नहीं माना जाता है।
  3. कड़वे वचन बोलने से बचें: इस माह में दूसरों से मीठा बोलें और क्रोध, कटुता से बचें।
  4. शुभ कार्य ना करें: अशुभ तिथियों, जैसे अष्टमी और सप्तमी, पर कोई भी शुभ काम करने से बचना चाहिए।


मार्गशीर्ष का महीना धर्म, भक्ति और शुद्धता का प्रतीक है। यह माह भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है और इस दौरान उनकी पूजा-अर्चना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। हालांकि, इस पवित्र माह में अशुभ तिथियों पर शुभ कार्यों से बचना चाहिए। साथ ही, इस दौरान भक्ति, दान-पुण्य और सकारात्मक कार्यों में लीन रहना चाहिए। ऐसा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से सभी बाधाएं दूर होती हैं।

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