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बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा (Banke Bihari Re Door Karo Dukh Mera)

बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा,

दूर करो दुख मेरा, बिहारी जी,

श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा ॥


सुना है जो तेरे दर पे आए,

उसके सब दुखड़े मिट जाए,

आया शरण तिहारी रे,

आया शरण तिहारी रे,

अब दूर करो दुख मेरा,

श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा ॥


जनम जनम का मैं हूँ भटका ,

बेड़ा आज भवर में अटका,

पार करो बनवारी रे,

अब दूर करो दुख मेरा,

श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा ॥


शबरी अहिल्या गणिका नारी,

सब ही तुमने पार उतारी,

आयी मेरी बारी रे,

अब दूर करो दुख मेरा,

श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा ॥


मोर मुकुट पीताम्बर धारी,

संग में हो श्री राधा प्यारी,

मेरे गिरवर धारी रे,

अब दूर करो दुख मेरा,

श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा ॥


बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा,

दूर करो दुख मेरा, बिहारी जी,

श्री बांके बिहारी रे दूर करो दुख मेरा ॥

खुल गये सारे ताले वाह क्या बात हो गयी(Khul Gaye Saare Taale Wah Kya Baat Ho Gai)

खुल गये सारे ताले वाह क्या बात हो गयी,
जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी ॥

तेरे बिना श्याम, हमारा नहीं कोई रे(Tere Bina Shyam Hamara Nahi Koi Re)

तेरे बिना श्याम,
हमारा नहीं कोई रे,

आता रहा है सांवरा, आता ही रहेगा (Aata Raha Hai Sanwara, Aata Hi Rahega)

आता रहा है सांवरा,
आता ही रहेगा,

पितृ पक्ष की पौराणिक कथा

संतान के द्वारा श्राद्धकर्म और पिंडदान आदि करने पर पितरों को तृप्ति मिलती है, और वे अपनी संतानों को धन-धान्य और खुश रहने का आशीर्वाद देते हैं।

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