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बोल कन्हैया बोल (Bol Kanhaiya Bol)

॥ दोहा ॥

वा रे लाला नन्द का,

तूने जनम चराई ढोर,

प्रीत कदे जाणी नहीं,

तूने खायो माखन चोर ॥


बोल कन्हैया बोल

बोल कन्हैया बोल तु तो ,

जेल में जन्मियो,

ना रे ना मे तो ,

गोकुल में जन्मियो,

बोल कन्हैया बोल तु तो ,

जेल में जन्मियो,

बोल कन्हैया बोल ॥


थारा पिता वासुदेव जी,

ना रे ना म्हारा ,

पिता नंदबाबा।

बोल कन्हैया बोल तु तो ,

जेल में जन्मियो ॥


बोल कन्हैया बोल ,

थारी माता है देवकी,

ना रे ना म्हारी ,

माता है यशोदा ॥


बोल कन्हैया बोल तु तो ,

जेल में जन्मियो,

बोल कन्हैया बोल ,

थाने दही प्यारो लागे ॥


ना रे ना म्हाने ,

माखन प्यारो लागे,

बोल कन्हैया बोल तु तो ,

जेल में जन्मियो ॥


बोल कन्हैया बोल ,

थाने राधा प्यारी लागे,

ना रे ना म्हाने ,

गोपिया प्यारी लागे ॥

बोल कन्हैया बोल तु तो ,

जेल में जन्मियो ॥


बोल कन्हैया बोल ,

थाने भक्त प्यारा लागे,

हां रे हां म्हाने ,

भक्त प्यारा लागे ॥


बोल कन्हैया बोल तु तो ,

जेल में जन्मियो,

ना रे ना मे तो ,

गोकुल में जन्मियो,

बोल कन्हैया बोल तु तो ,

जेल में जन्मियो ॥


क्यों मनाते हैं सकट चौथ

सकट चौथ व्रत करने से भगवान गणेश जी प्रसन्न होते हैं और सभी प्रकार के दुखों को हर लेते हैं। इस दिन माताएं अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करना बेहद आवश्यक माना गया है।

2025 की पहली बैकुंठ एकादशी कब है

सनातन धर्म में बैकुंठ एकादशी का विषेश महत्व है। इस पवित्र दिन पर भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को मृत्यु उपरांत बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है।

वार्षिक श्राद्ध पूजा विधि

हिंदू धर्म में श्राद्ध पूजा का विशेष महत्व है। यह पितरों यानी पूर्वजों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक प्रमुख अनुष्ठान है। जो सदियों से हिंदू संस्कृति में करा जाता है। श्राद्ध संस्कार में पिंडदान, और ब्राह्मण भोजन कराया जाता है।

ढँक लै यशोदा नजर लग जाएगी (Dhank Lai Yashoda Najar Lag Jayegi)

ढँक लै यशोदा नजर लग जाएगी
कान्हा को तेरे नजर लग जाएगी ।

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