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हे शेरावाली नजर एक कर दो(Hey Sherawali Nazar Ek Kar Do)

हे शेरावाली नजर एक कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो,

अपने ही रंग में मेरा चोला रंग दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥


तेरे सिवा ना मुझे कुछ भी भाए,

देखूं जिधर भी नज़र तू ही आए,

मुझको दीवाना कर इस कदर दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥


रूठे भले माँ ये सारा जमाना,

हे जग की मालिक ना तुम रूठ जाना,

सिर पे तू मेरे माँ हाथ धर दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥


दे दो मुझे भीख में अपनी भक्ति,

चढ़ के ना उतरे माँ दो ऐसी मस्ती,

फैलाए कबसे खड़ा झोली भर दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥


सोए जगा दो हे माँ भाग्य मेरे,

गाता रहूं बस भजन मैया तेरे,

‘राजू’ को मैया बस इतना वर दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥


हे शेरावाली नजर एक कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो,

अपने ही रंग में मेरा चोला रंग दो,

हे शेरावाली नजर मुझपे कर दो,

हे मेहरवाली माँ मेहर एक कर दो ॥

मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों बनती है

मकर संक्रांति का त्योहार आगामी 14 जनवरी को है। देश के कई हिस्सों में इसे खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। खिचड़ी के चावल से चंद्रमा और शुक्र की शांति संबंधित है।

मैंने रटना लगाई रे, राधा तेरे नाम की (Maine Ratna Lagai Re Radha Tere Naam Ki)

मैंने रटना लगाई रे,
राधा तेरे नाम की,

खरमास माह में तुलसी पूजा का महत्व

सनातन धर्म में तुलसी का खास महत्व है। तुलसी को लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है। इसलिए, बिना तुलसी के श्रीहरि की पूजा पूरी नहीं मानी जाती। सभी घरों में सुबह-शाम तुलसी पूजा की जाती है।

दुःख की बदली, जब जब मुझ पे छा गई(Dukh Ki Badli Jab Jab Mujhpe Cha Gayi )

दुःख की बदली,
जब जब मुझ पे छा गई,