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जपते रहो सुबह शाम भोलेनाथ (Japte Raho Subah Shaam Bholenath)

जपते रहो सुबह शाम भोलेनाथ,

जग में साँचा तेरा नाम भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ ॥


सांझ सवेरे भोलेनाथ के,

मंत्र का कर लो सुमिरन,

इनके सुमिरन से कटती है,

जीवन की हर उलझन,

कर दो मुश्किल सभी,

आसान भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ ॥


श्रष्टि के कण कण में केवल,

शिव का रूप समाया,

शिव के रूप की महिमा कोई,

जान कभी नहीं पाया,

तीनो लोको में सबसे,

महान भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ ॥


अम्बर जैसी ऊंचाई है और,

सागर सी गहराई,

शिव शंकर के नाम में तो है,

सारी सृष्टि समाई,

सारी सृष्टि का रखते है,

ध्यान भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ ॥


सबके कष्ट मिटाते है ये,

सबके काम बनाते,

उसको कष्ट नहीं आते,

जो इनके नाम को ध्याते,

सदा भक्तो का करते,

कल्याण भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ ॥


जपते रहो सुबह शाम भोलेनाथ,

जग में साँचा तेरा नाम भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ,

जपते रहों सुबह शाम भोलेनाथ ॥


जबसे बरसाने में आई, मैं बड़ी मस्ती में हूँ(Jab Se Barsane Me Aayi Main Badi Masti Me Hun)

जबसे बरसाने में आई,
मैं बड़ी मस्ती में हूँ,

रथ सप्तमी उपाय 2025

रथ-सप्तमी का पर्व हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल रथ-सप्तमी का पर्व 4 फरवरी 2025 को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान सूर्य देव को समर्पित है।

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सूर्य चालीसा (Surya Chalisa)

कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग। पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।

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