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जिसने मरना सीखा लिया है (Jisane Marana Seekh Liya Hai)

जिसने मरना सीखा लिया है,

जीने का अधिकार उसी को ।

जो काँटों के पथ पर आया,

फूलों का उपहार उसी को ॥


जिसने गीत सजाये अपने

तलवारों के झन-झन स्वर पर

जिसने विप्लव राग अलापे

रिमझिम गोली के वर्षण पर

जो बलिदानों का प्रेमी है,

जगती का प्यार उसी को ॥


हँस-हँस कर इक मस्ती लेकर

जिसने सीखा है बलि होना

अपनी पीड़ा पर मुस्काना

औरों के कष्टों पर रोना

जिसने सहना सीख लिया है,

संकट है त्यौहार उसी को ॥


दुर्गमता लख बीहड़ पथ की

जो न कभी भी रुका कहीं पर

अनगिनती आघात सहे पर

जो न कभी भी झुका कहीं पर

झुका रहा है मस्तक अपना यह,

सारा संसार उसी को ॥

जन्मे है राम रघुरैया, अवधपुर में (Janme Hai Ram Raghuraiya Awadhpur Mein )

जन्मे है राम रघुरैया,
अवधपुर में बाजे बधैया,

मेरे संग संग चलती(Mere Sang Sang Chalti)

संकट में झुँझन वाली की,
सकलाई देखि है,

झूलेलाल जयंती क्यों और कैसे मनाए

झूलेलाल जयंती, जिसे चेटीचंड के नाम से भी जाना जाता है, सिंधी समुदाय के लिए एक पवित्र और महत्वपूर्ण दिन होता है। यह पर्व चैत्र शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है, जो हिंदू नववर्ष के प्रारंभिक दिनों में आता है।

मार्गशीर्ष माह में कब-कब पड़ेंगे प्रदोष व्रत?

हर माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। यह व्रत पूर्ण रूप से भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है।

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