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कर प्रणाम तेरे चरणों में - प्रार्थना (Kar Pranam Tere Charno Me: Morning Prarthana)

प्रातःकाल की प्रार्थना

कर प्रणाम तेरे चरणों में लगता हूं अब तेरे काज ।

पालन करने को आज्ञा तब मैं नियुक्त होता हूं आज ॥


अन्तर में स्थित रह मेरी बागडोर पकड़े रहना ।

निपट निरंकुश चंचल मन को सावधान करते रहना ॥


अन्तर्यामी को अन्तः स्थित देख सशंकित होवे मन ।

पाप वासना उठते ही हो, नाश लाज से वह जल भुन ॥


जीवों का कलरव जो दिन भर सुनने में मेरे आवे ।

तेरा ही गुनमान जान मन प्रमुदित हो अति सुख पावे ॥


तू ही है सर्वत्र व्याप्त हरि ! तुझमें यह सारा संसार ।

इसी भावना से अन्तर भर मिलूं सभी से तुझे निहार ॥


प्रतिपल निज इन्द्रिय समूह से जो कुछ भी आचार करूं ।

केवल तुझे रिझाने, को बस तेरा ही व्यवहार करूं ॥


मेरी छोटी सी है नाव(Meri Chhoti Si Hai Naav)

मेरी छोटी सी है नाव,
तेरे जादू भरे पॉंव,

नंदरानी कन्हयो जबर भयो रे(Nandrani Kanhaiya Jabar Bhayo Re)

नंदरानी कन्हयो जबर भयो रे,
मेरी मटकी उलट के पलट गयो रे ॥

माता चंडी की पूजा विधि

मां चंडी जो विशेष रूप से शक्ति, दुर्गा और पार्वती के रूप में पूजी जाती हैं। उनका रूप रौद्र और उग्र होता है, और वे शत्रुओं का नाश करने वाली, बुराई का विनाश करने वाली और संसार को शांति देने वाली देवी के रूप में पूजा जाती हैं।

महाकाल की नगरी मेरे मन को भा गई (Mahakal Ki Nagri Mere Maan Ko Bha Gayi)

मेरे भोले की सवारी आज आयी,
मेरे शंकर की सवारी आज आयी,