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फूल देई, छम्मा देई (Phool Dei, Chamma Dei Geet)

उत्तराखंड के कुमाऊं एवं गढ़वाल में फुलारी बच्चों द्वारा घर की खुशहाली तथा सुख सम्रद्धि के लिए गाया जाने वाला गीत।

फूल देई, छम्मा देई ।

जतुके दियाला, उतुके सई ॥

फूल देई, छम्मा देई ।

जतुके दियाला, उतुके सई ॥


बार मेना में आ रेचो त्यार

नंतिना अर्ना देहि


फूल देई, छम्मा देई ।

जतुके दियाला, उतुके सई ॥

फूल देई, छम्मा देई ।

जतुके दियाला, उतुके सई ॥


फूली बिरुडी आड़ू खुमानी

बुराशी फूली उची दानी

फूली बिरुडी आड़ू खुमानी

बुराशी फूली उची दानी

पेली टायर पंचमी की आलो

लग्लो चेत फागुन झालो


फूल देई, छम्मा देई ।

जतुके दियाला, उतुके सई ॥

फूल देई, छम्मा देई ।

जतुके दियाला, उतुके सई ॥


चैत को मैण, एक पैट,

चेली को सुर पराण मैत

चैत को मैण, एक पैट,

चेली को सुर पराण मैत

फुल खज़ भेटोली आली

रंगलो लगी गो चे चेट


फूल देई, छम्मा देई ।

जतुके दियाला, उतुके सई ॥

फूल देई, छम्मा देई ।

जतुके दियाला, उतुके सई ॥


नंदिनो की फुलो की थाई

गा ओमिजी आरे फुलो दीवाई

नंदिनो की फुलो की थाई

गा ओमिजी आरे फुलो दीवाई

छाव भारी थाई हरनेने

हाथ मुझे लेरे गुड के ढी


फूल देई, छम्मा देई ।

जतुके दियाला, उतुके सई ॥

फूल देई, छम्मा देई ।

जतुके दियाला, उतुके सई ॥


द्वारे चलिए मैय्या के द्वारे चलिए

द्वारे चलिए, मैय्या के द्वारे चलिए
द्वारे चलिए, मैय्या के द्वारे चलिए

कंस वध मनाने की परंपरा (Kans Vadh Manane Ki Parampara)

दीपोत्सव यानी दिवाली के ठीक 10वें दिन एक और पर्व मनाया जाता है, जो हमें सिखाता है कि कैसे हमेशा बुराई पर अच्छाई की विजय होती है।

तेरे दरबार में मैय्या खुशी मिलती है

तेरी छाया मे, तेरे चरणों में,
मगन हो बैठूं, तेरे भक्तों में॥