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खेले मसाने में होरी, दिगम्बर(Khele Masane Mein Holi Digambar)

खेले मसाने में होरी,

दिगम्बर,

खेले मसानें में होरी,

भूत पिशाच बटोरी,

दिगम्बर,

खेले मसानें में होरी ॥


गोप ना गोपी श्याम ना राधा,

ना कोई रोक ना कौनो बाधा,

ना साजन ना गोरी,

दिगम्बर,

खेले मसानें में होरी ॥


नाचत गावत डमरू धारी,

छोड़े सर्प गरल पिचकारी,

पीटे प्रेत थपोरी,

दिगम्बर,

खेले मसानें में होरी ॥


भूतनाथ की मंगल होरी,

देख सिहाये बिरज की छोरी,

धन धन नाथ अघोरी,

दिगम्बर,

खेले मसानें में होरी ॥


खेले मसाने में होरी,

दिगम्बर,

खेले मसानें में होरी,

भूत पिशाच बटोरी,

दिगम्बर,

खेले मसानें में होरी ॥

मेरे ओ सांवरे, तूने क्या क्या नहीं किया (Mere O Sanware Tune Kya Kya Nahi Kiya)

मेरे ओ सांवरे,
तूने क्या क्या नहीं किया,

शबरी जयंती क्यों मनाई जाती है?

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है, जो भगवान राम और उनकी भक्त शबरी के बीच के पवित्र बंधन का प्रतीक है।

सन्तोषी माता/शुक्रवार की ब्रत कथा (Santhoshi Mata / Sukravaar Ki Vrat Katha

एक नगरमें एक बुढ़ियाके सात पुत्र थे, सातौके विवाह होगए, सुन्दर स्त्री घर में सम्पन्न थीं। बड़े बः पुत्र धंधा करते थे बोटा निठल्ला कुछ नहीं करता था और इस ध्यान में मग्न रहता था कि में बिना किए का खाता हूं।

है पावन शिव का धाम हरिद्वार (Hai Pawan Shiv Ka Dham Haridwar)

कल कल कल जहाँ निर्मल बहती,
माँ गंगा की धार,

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