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मेरे ओ सांवरे, तूने क्या क्या नहीं किया (Mere O Sanware Tune Kya Kya Nahi Kiya)

मेरे ओ सांवरे,

तूने क्या क्या नहीं किया,

जब लगा मैं गिरा,

थामा तूने लिया,

फिर दोबारा ना गिरने दिया,

मेरे ओ साँवरे,

तूने क्या क्या नहीं किया ॥


अपनों की कहूं,

क्या मैं तुझसे प्रभु,

कौन अपना है ये,

जानता है भी तू,

डाल मुझ पे नज़र,

तू मेरा हमसफर,

है ये जग को बता दिया,

मेरे ओ साँवरे,

तूने क्या क्या नहीं किया ॥


जिसपे पड़ जाती है,

श्याम तेरी नज़र,

डगमगाती नहीं ,

कभी उसकी डगर,

संकटों ने ना फिर,

मुडके उसकी तरफ,

रुख दोबारा कभी भी किया,

मेरे ओ साँवरे,

तूने क्या क्या नहीं किया ॥


मेरी है एक अरज,

तुमसे ऐ सांवरे,

देना कुछ भी,

ना देना अहम सांवरे,

गाऊं तेरे मैं गुण,

हर जगह घूम घूम,

श्याम ने क्या से क्या कर दिया,

मेरे ओ साँवरे,

तूने क्या क्या नहीं किया ॥


मेरे ओ सांवरे,

तूने क्या क्या नहीं किया,

जब लगा मैं गिरा,

थामा तूने लिया,

फिर दोबारा ना गिरने दिया,

मेरे ओ साँवरे,

तूने क्या क्या नहीं किया ॥

माँ दुर्गे आशीष दो (Maa Durge Ashish Do)

माँ दुर्गे आशीष दो माँ दुर्गे आशीष दो
मन मे मेरे वास हो तेरा चरणो संग प्रीत हो ॥

धूम मची है धूम माँ के दर (Dhoom Machi Hai Dhoom Maa Ke Dar)

धूम मची है धूम माँ के दर,
धूम मची है धूम ॥

चैत्र महीना भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे चैत्र माह में मनाया जाता है। इस दिन गणपति बप्पा की पूजा करने से भक्तों को सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस वर्ष भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 17 मार्च 2025, सोमवार को मनाई जाएगी।

प्रदोष व्रत और इसके प्रकार

प्रदोष व्रत हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और प्रत्येक वार पर आने वाले प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व और फल है।