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लोरी सुनाए गौरा मैया(Lori Sunaye Gaura Maiya)

लोरी सुनाए गौरा मैया,

झूला झूले गजानंद,

रिमझिम रिमझिम बरसे बदरिया,

रिमझिम रिमझिम बरसे बदरिया,

झूला झूले गजानंद,

लोरी सुनाए गोरा मैया,

झूला झूले गजानंद ॥


शिव शंकर का डमरू बाजे,

नारद नाचे नंदी नाचे,

ठंडी ठंडी चले पुरवैया,

ठंडी ठंडी चले पुरवैया,

झूला झूले गजानंद,

लोरी सुनाए गोरा मैया,

झूला झूले गजानंद ॥


कोई पीताम्बर पहनाए,

आँखों में कोई कजरा लगाए,

लागे ना देवा तुमको नजरिया,

लागे ना देवा तुमको नजरिया,

झूला झूले गजानंद,

लोरी सुनाए गोरा मैया,

झूला झूले गजानंद ॥


मंगल गीत यहाँ देवियां गाए,

सुर नर मुनि सब पर्व मनाए,

खुश है निरंजन सारी दुनिया,

खुश है निरंजन सारी दुनिया,

झूला झूले गजानंद,

लोरी सुनाए गोरा मैया,

झूला झूले गजानंद ॥


लोरी सुनाए गौरा मैया,

झूला झूले गजानंद,

रिमझिम रिमझिम बरसे बदरिया,

रिमझिम रिमझिम बरसे बदरिया,

झूला झूले गजानंद,

लोरी सुनाए गोरा मैया,

झूला झूले गजानंद ॥


स्वर्ण स्वर भारत (Swarn Swar Bharat)

है नया ओज है नया तेज,
आरंभ हुआ नव चिंतन

राम दशरथ के घर जन्मे (Ram Dashrath Ke Ghar Janme)

राम दशरथ के घर जन्मे,
घराना हो तो ऐसा हो,

मोहे रंग दो अपने ही रंग में, मोहे ओ सांवरिया(Mohe Rang Do Apne Hi Rang Mein Mohe O Sawariya)

नैना लागे जब मोहन से,
नैना को कुछ रास ना आए,

ललिता देवी मंदिर शक्तिपीठ

मां ललिता देवी का मंदिर देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर 88 हजार ऋषियों की तपस्थली, वेदों और पुराणों की रचना स्थली नैमिषारण्य में स्थित है। मां ललिता देवी को त्रिपुर सुंदरी के नाम से भी जाना जाता है।

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