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माँ रेवा: थारो पानी निर्मल (Maa Rewa: Tharo Pani Nirmal)


माँ रेवा थारो पानी निर्मल,

खलखल बहतो जायो रे..

माँ रेवा !


अमरकंठ से निकली है रेवा,

जन-जन कर गयो भाड़ी सेवा..

सेवा से सब पावे मेवा,

ये वेद पुराण बतायो रे !


माँ रेवा थारो पानी निर्मल,

खलखल बहतो जायो रे..

माँ रेवा !

महर्षि वाल्मीकि जयंती 2024: की कथा, तिथि

वाल्मीकि जयंती अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इसे शरद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

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बुध प्रदोष व्रत, नवंबर 2024

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