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मईया जी से होगा मिलन धीरे धीरें (Maiya Ji Se Hoga Milan Dheere Dheere)

लग जाएगी लगन धीरे धीरे,

मैया जी से होगा मिलन धीरे धीरे,

मईया जी से होगा मिलन धीरे धीरें ॥


करले भरोसा मैया पे प्यारे,

छोड़ दे झूठे जग के सहारे,

जुड़ जाएगा ये मन धीरे धीरे,

जुड़ जाएगा ये मन धीरे धीरे,

मईया जी से होगा मिलन धीरे धीरें ॥


ज्ञानू सरिका करले समर्पण,

चरणों में कर दे खुद को तू अर्पण,

धड़क उठेगी अगन धीरे धीरे,

धड़क उठेगी अगन धीरे धीरे,

मईया जी से होगा मिलन धीरे धीरें ॥


दिल को लगा ले चरणों में प्यारे,

‘हर्ष’ रहेगी संग ये तुम्हारे,

महसूस होगीं छुअन धीरे धीरे,

महसूस होगीं छुअन धीरे धीरे,

मईया जी से होगा मिलन धीरे धीरें ॥


लग जाएगी लगन धीरे धीरे,

मैया जी से होगा मिलन धीरे धीरे,

मईया जी से होगा मिलन धीरे धीरें ॥

प्रदोष व्रत और इसके प्रकार

प्रदोष व्रत हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और प्रत्येक वार पर आने वाले प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व और फल है।

हमने आँगन नहीं बुहारा (Hamne Aangan Nahi Buhara, Kaise Ayenge Bhagwan)

हमने आँगन नहीं बुहारा,
कैसे आयेंगे भगवान् ।

भगवान शिव क्यों बने थे भिखारी

संसार के सभी जीव-जंतु जीवित रहने हेतु भोजन पर निर्भर रहते हैं। सनातन हिंदू धर्म में देवी अन्नपूर्णा को अन्न के भंडार और इसकी पूर्ति करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। देवी अन्नपूर्णा की पूजा के पीछे एक पौराणिक कथा है।

सुबह सुबह हे भोले (Subha Subha Hey Bhole)

सुबह सुबह हे भोले करते हैं तेरी पूजा,
तेरे सिवा हुआ है ना होगा कोई दूजा ।

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