नवीनतम लेख

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो (Maiya Mori Mai Nahi Makhan Khayo)

मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो ।


भोर भयो गैयन के पाछे,

मधुवन मोहिं पठायो ।

चार पहर बंसीबट भटक्यो,

साँझ परे घर आयो ॥


मैं बालक बहिंयन को छोटो,

छींको किहि बिधि पायो ।

ग्वाल बाल सब बैर परे हैं,

बरबस मुख लपटायो ॥


तू जननी मन की अति भोरी,

इनके कहे पतिआयो ।

जिय तेरे कछु भेद उपजि है,

जानि परायो जायो ॥


यह लै अपनी लकुटि कमरिया,

बहुतहिं नाच नचायो ।

सूरदास तब बिहँसि जसोदा,

लै उर कंठ लगायो ॥

पुत्रदा एकादशी 2025

पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा या वैकुंठ एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पुत्र या संतान प्राप्ति के लिए उपाय करने से सफलता मिलती है। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

छठ पूजा: मारबो रे सुगवा (Marbo Re Sugwa Dhanukh Se Chhath Puja Song)

ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से,
ओह पर सुगा मेड़राए।

दर्श अमावस्या पूजा विधि

हिंदू धर्म में दर्श अमावस्या का विशेष महत्व है, जो पितरों की शांति और मोक्ष की प्राप्ति के लिए समर्पित मानी जाती है। इस दिन पितरों की पूजा करना, तर्पण देना और धूप देना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

काल भैरव की कथा

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती मनाई जाती है। इस दिन तंत्र-मंत्र के देवता काल भैरव की पूजा की जाती है, जो भगवान शिव के रौद्र रूप हैं।