नवीनतम लेख

मेरा संकट कट गया जी (Mera Sankat Kat Gaya Ji)

मेरा संकट कट गया जी,

मेहंदीपुर के दरबार में,

मेरा संकट कट ग्या,

संकट कट ग्या,

संकट कट ग्या जी,

मेरा संकट कट ग्या जी,

मेहंदीपुर के दरबार में ॥


क दिन चौराहे के ऊपर,

पैर मेरा था आया,

पीछे पड़ गया यारो मेरे,

एक भूत का साया,

हालत मेरी बिगड़न लागी,

समझ नहीं कुछ आवे,

मेरे बस की बात नही वो,

मन्ने घणा सतावे,

वो मेरे चिपट गया जी,

मैं सर मारू दीवार में,

मेरा संकट कट ग्या जी,

मेहंदीपुर के दरबार में ॥


श्याणे शपटे रोज करे,

चिमटे से मेरी पिटाई,

डॉक्टर वैद्य दिखाता डोलूं,

लागे नही दवाई,

एक जना यूँ बोला इसने,

मेहंदीपुर ले चालो,

बांध जूट ते इसने,

तुम सूमो के अंदर घालो,

मैं जाने ते नट गया जी,

उस बाबा के दरबार में,

मेरा संकट कट ग्या जी,

मेहंदीपुर के दरबार में ॥


मेहंदीपुर पंहुचा तो,

‘नरसी’ चेन थोड़ा सा आया,

लागा जब आरती का छींटा,

निर्मल हो गई काया,

भूत प्रेत सब भागे मेरे,

मिल गया था छुटकारा,

बालाजी ने कर दिया मेरे,

संकट का निपटारा,

मेरे संकट का निपटारा,

मन्ने बेरा पट गया जी,

ना इसा कोई संसार में,

मेरा संकट कट ग्या जी,

मेहंदीपुर के दरबार में ॥


मेरा संकट कट गया जी,

मेहंदीपुर के दरबार में,

मेरा संकट कट ग्या,

संकट कट ग्या,

संकट कट ग्या जी,

मेरा संकट कट ग्या जी,

मेहंदीपुर के दरबार में ॥


गणपति तेरे चरणों की, पग धूल जो मिल जाए (Ganapati Tere Charno Ki Pag Dhool Jo Mil Jaye)

गणपति तेरे चरणों की,
बप्पा तेरे चरणों की,

आजा.. नंद के दुलारे हो..हो..: भजन (Ajaa Nand Ke Dulare)

आजाआ... ओओओ...
आजा.. नंद के दुलारे हो..हो..

रुक्मिणी अष्टमी के दिन करें ये उपाय

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है। जो इस साल 22 दिसंबर को मनाया जा रहा है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की पहली पत्नी देवी रुक्मिणी के जन्म की याद में मनाया जाता है।

जन्माष्टमी पूजन विधि (Janmashtami Poojan Vidhi)

भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी का किया जाने वाला व्रत

यह भी जाने