नवीनतम लेख

मेरी आस तू है माँ, विश्वास तू है माँ(Meri Aas Tu Hai Maa Vishwas Tu Hai Maa)

मेरी आस तू है माँ,

विश्वास तू है माँ,

मेरी हर ख़ुशी का अब,

आगाज़ तू है माँ,

दे दे माँ आँचल की छइयां मुझे,

ले ले माँ बाहों में अपनी मुझे ॥


ग़म के थपेड़े ये,

कैसे सहें मैया,

एक बार आके माँ,

तू थाम ले बइयाँ,

वरना मैं समझूंगा नाराज़ तू है माँ,

मेरी हर ख़ुशी का अब,

आगाज़ तू है माँ,

दे दे माँ आँचल की छइयां मुझे,

ले ले माँ बाहों में अपनी मुझे ॥


कितनी करूँ कोशिश,

कोई काम नहीं बनता,

दिल पे लगे ज़ख्मो का,

माँ दर्द नहीं थमता,

करदे करम मुझपे मोहताज हूँ मैं माँ,

मेरी हर ख़ुशी का अब,

आगाज़ तू है माँ,

दे दे माँ आँचल की छइयां मुझे,

ले ले माँ बाहों में अपनी मुझे ॥


किस्मत मेरी मैया,

क्यों मुझसे रूठ गई,

इसके संवरने की,

उम्मीद भी टूट गई,

कल तक अकेला था पर आज तू है माँ,

मेरी हर ख़ुशी का अब,

आगाज़ तू है माँ,

दे दे माँ आँचल की छइयां मुझे,

ले ले माँ बाहों में अपनी मुझे ॥


नैया भंवर में है,

तुझको पुकारा माँ,

सूझे नहीं रस्ता,

तुझको निहारा माँ,

‘हरी’ हार नहीं सकता गर साथ तू है माँ,

मेरी हर ख़ुशी का अब,

आगाज़ तू है माँ,

दे दे माँ आँचल की छइयां मुझे,

ले ले माँ बाहों में अपनी मुझे ॥


मेरी आस तू है माँ,

विश्वास तू है माँ,

मेरी हर ख़ुशी का अब,

आगाज़ तू है माँ,

दे दे माँ आँचल की छइयां मुझे,

ले ले माँ बाहों में अपनी मुझे ॥

क्यों मनाते हैं कजलियां पर्व (Kyon Manaate Hain Kajaliyaan Parv)

रक्षाबंधन के एक दिन बाद क्यों मनाते हैं कजलियां पर्व, जानिए क्या है इनका इतिहास

शिव शंकर भोलेनाथ, तेरा डमरू बाजे पर्वत पे (Shiv Shankar Bholenath Tera Damru Baje Parvat Pe)

शिव शंकर भोलेनाथ,
तेरा डमरू बाजे पर्वत पे,

प्रदोष व्रत चालीसा

हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो भगवान शिव की पूजा को समर्पित होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रदोष व्रत कन्याओं के लिए बेहद खास होता है, इस दिन भोलेनाथ की उपासना करने और व्रत रखने से मनचाहा वर पाने की कामना पूरी होती हैं।

मेरे गणनायक तुम आ जाओ (Mere Gannayak Tum Aa Jao)

मेरे गणनायक तुम आ जाओ,
मैं तो कबसे बाट निहार रही,

यह भी जाने