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म्हाने शेरोवाली मैया, राज रानी लागे(Mhane Sherawali Maiya Rajrani Laage)

म्हाने प्राणा सु भी प्यारी,

माता रानी लागे,

माता रानी लागे,

म्हाने शेरोवाली मैया,

राज रानी लागे ॥


हाथां ले त्रिशूल भवानी,

सिंह पे चढ़ के आई,

घर में म्हारे आकर मैया,

म्हारो मान बढाई,

म्हापे हुकुम चलावे,

माँ धिरानी लागे,

म्हाने शेरावाली मैया,

राज रानी लागे ॥


थारा चरण पड्या तो मैया,

खुल गई क़िस्मत म्हारी,

‘हर्ष’ कवे माँ टाबरिया पे,

हो गई किरपा भारी,

थारी म्हारी मैया प्रीत,

पुराणी लागे पुराणी लागे,

म्हाने शेरावाली मैया,

राज रानी लागे ॥


म्हाने प्राणा सु भी प्यारी,

माता रानी लागे,

माता रानी लागे,

म्हाने शेरोवाली मैया,

राज रानी लागे ॥

गौरा ने घोट कर, पीस कर छान कर(Gora Ne Ghot Kar Piskar Chhankar)

गौरा ने घोट कर,
पीस कर छान कर,

सारी दुनिया में आनंद छायो, कान्हा को जन्मदिन आयो(Sari Duniya Me Aanand Chayo Kanha Ko Janamdin Aayo)

सारी दुनिया में आनंद छायो,
कान्हा को जन्मदिन आयो ॥

भजमन राम चरण सुखदाई (Bhajman Ram Charan Sukhdayi)

भजमन राम चरण सुखदाई,
भजमन राम चरण सुखदाई ॥

दिसंबर माह के प्रदोष व्रत

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। यह व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। भगवान शिव की साधना करने वाले साधक को पृथ्वी लोक के सभी सुख प्राप्त होते हैं और मृत्यु उपरांत उच्च लोक में स्थान मिलता है।

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