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गौरा ने घोट कर, पीस कर छान कर(Gora Ne Ghot Kar Piskar Chhankar)

गौरा ने घोट कर,

पीस कर छान कर,

शिव को भंगिया पिलाई,

मजा आ गया,

छोड़ कैलाश को,

पहुंचे शमशान में,

गांजे की दम लगायी,

मजा आ गया ॥


जब नशा भांग,

गांजे का चढ़ने लगा,

भोला नचने लगे,

डमरू बजने लगा,

जल चुकी थी चिताएं,

जो शमशान में,

उनकी भस्मी रमाई,

मजा आ गया ॥


बदी फागुन चतुर्दश,

तिथी आई है,

शिव से गौरा मिलन,

की घड़ी आई है,

शिवजी दूल्हा बने,

गौरा दुल्हन बनी,

ऐसी शादी रचाई,

मजा आ गया ॥


भोला धनवान है,

न तो कंगाल है,

शिव महादेव हैं,

शिव महाकाल है,

शिव के चरणों में हम,

आ गये हैं पदम्,

राह मुक्ति की पाई,

मजा आ गया ॥


गौरा ने घोट कर,

पीस कर छान कर,

शिव को भंगिया पिलाई,

मजा आ गया,

छोड़ कैलाश को,

पहुंचे शमशान में,

गांजे की दम लगायी,

मजा आ गया ॥

अंजनीसुत केसरी नंदन ने (Anjani Sut Kesari Nandan Ne)

अंजनीसुत केसरी नंदन ने,
श्री राम के कारज सारे है,

होलाष्टक से जुड़े पौराणिक कथा

होलाष्टक का सबसे महत्वपूर्ण कारण हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की कथा से जुड़ा है। खुद को भगवान मानने वाला हिरण्यकश्यप अपने बेटे प्रह्लाद की भक्ति से नाराज था।

दाता एक राम, भिखारी सारी दुनिया (Data Ek Ram Bhikhari Sari Duniya)

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भिखारी सारी दुनिया ।

शबरी जयंती क्यों मनाई जाती है?

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है, जो भगवान राम और उनकी भक्त शबरी के बीच के पवित्र बंधन का प्रतीक है।

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