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नमो नमो हे भोले शंकरा(Namo Namo Hey Bhole Shankara)

मैंने पाया नशा है,

मेरा बस तुझमे,

मेरे भोले मेरे भोले,

छोड़ चिंता मिली हूँ,

मैं तो बस तुझमे,

मेरे भोले मेरे भोले,

नमो नमो हे भोले शंकरा,

शंकरा भोले शंकरा ॥


मैंने शंखो से अर्जी है भेजी तुझे,

पूरी मस्ती में डूबी मैं पूजूँ तुझे,

तूने बरसाई गंगा यहाँ सब पे,

रोज दर्शन किया है,

तेरा मैंने मुझमे,

नमो नमो हे भोलें शंकरा,

शंकरा भोले शंकरा ॥


डमरू पे ये नाचे मन ऐसे,

मिल जाता हूँ मुझसे मैं जैसे,

शिव तेरे है रंग हजारों,

एक रंग मैं देखूं कैसे,

मेरी किस्मत का चंदा,

है तेरे सर पे,

मेरे भोले मेरे भोले,

नमो नमो हे भोलें शंकरा,

शंकरा भोले शंकरा ॥


मैंने पाया नशा है,

मेरा बस तुझमे,

मेरे भोले मेरे भोले,

छोड़ चिंता मिली हूँ,

मैं तो बस तुझमे,

मेरे भोले मेरे भोले,

नमो नमो हे भोले शंकरा,

शंकरा भोले शंकरा ॥

दिवाली पूजन कथा

सनातन धर्म में दिवाली का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।

कृष्ण कन्हैया बंसी बजैया (Krishna Kanhaiya Bansi Bajaiya)

कृष्ण कन्हैया बंसी बजैया,
नंदलाला घनश्याम रे,

उज्जैनी में बाबा ने ऐसा, डमरू बजाया (Ujjaini Me Baba Ne Esa Damru Bajaya)

उज्जैनी में बाबा ने ऐसा,
डमरू बजाया,

स्कन्द षष्ठी व्रत की पूजा विधि

भगवान कार्तिकेय को सुब्रमण्यम, कार्तिकेयन, स्कंद और मुरुगन जैसे नामों से जाना जाता है। वे शक्ति और विजय के देवता हैं। उनकी आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि, सफलता और सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है।

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