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नन्द बाबा के अंगना देखो बज रही आज बधाई(Nand Baba Ke Angana Dekho Baj Rahi Aaj Badhai)

नन्द बाबा के अंगना देखो,

बज रही आज बधाई,

नगाड़ा जोर से बजा दे,

मैं नृत्य करन को आई,

नगाड़ा जोर से बजा दे,

मैं नृत्य करन को आई ॥


ढोल झांझ मृदंगहूँ बाजे,

और बाजे शहनाई,

सजधज कर सब सखियाँ आई,

गावन लगी बधाई,

मैं भी नाचन को आई,

मैं भी गावन को आई,

नगाड़ा जोर से बजा दे,

मैं नृत्य करन को आई,

नगाड़ा जोर से बजा दे,

मैं नृत्य करन को आई ॥


मंगल साज सजाये सखी सब,

मैया के ढिंग आए,

युग युग जीवे तेरो लाला,

ये आशीष सुनाई,

काली घटा है छाई,

सब दौड़ दौड़ कर आई,

नगाड़ा जोर से बजा दे,

मैं नृत्य करन को आई,

नगाड़ा जोर से बजा दे,

मैं नृत्य करन को आई ॥


नन्द बाबा के अंगना देखो,

बज रही आज बधाई,

नगाड़ा जोर से बजा दे,

मैं नृत्य करन को आई,

नगाड़ा जोर से बजा दे,

मैं नृत्य करन को आई ॥

प्रभु राम का सुमिरन कर (Prabhu Ram Ka Sumiran Kar)

प्रभु राम का सुमिरन कर,
हर दुःख मिट जाएगा,

माँ दुर्गे आशीष दो (Maa Durge Ashish Do)

माँ दुर्गे आशीष दो माँ दुर्गे आशीष दो
मन मे मेरे वास हो तेरा चरणो संग प्रीत हो ॥

शीतला अष्टमी पर बासी भोजन का महत्व

शीतला अष्टमी, जिसे बसोड़ा भी कहा जाता है, होली के सात दिन बाद मनाई जाती है। इस दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग अर्पित किया जाता है।

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