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सुध ले लो मेरी घनश्याम - भजन (Sudh Le Lo Meri Ghanshyam)

सुध ले लो मेरी घनश्याम,

आप आए नहीं,

और खबर भी न ली,

खत लिख लिख के भेजे तमाम,

सुध ले लों मेरी घनश्याम,

सुध ले लों मेरी घनश्याम ॥


हम तो कन्हैया हुए तेरे ही दीवाने,

चाहे तू माने या चाहे ना माने,

आँखों में छाए मेरे दिल में समाए,

बस होंठों पे है तेरा नाम,

सुध ले लों मेरी घनश्याम,

सुध ले लों मेरी घनश्याम ॥


संग की सखियाँ हुई तेरी ही दीवानी,

दिन रात रोती रहे आँखों से पानी,

देती सुनाई हमें मुरली सुहानी,

गीत छेड़े विरह के तमाम,

सुध ले लों मेरी घनश्याम,

सुध ले लों मेरी घनश्याम ॥


सुध ले लो मेरी घनश्याम,

आप आए नहीं,

और खबर भी न ली,

खत लिख लिख के भेजे तमाम,

सुध ले लों मेरी घनश्याम,

सुध ले लों मेरी घनश्याम ॥

श्रावण शुक्ल की पुत्रदा एकादशी (Shraavan Shukl Kee Putrada Ekaadashee)

युधिष्ठिर ने कहा-हे केशव ! श्रावण मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का क्या नाम और क्या माहात्म्य है कृपया आर कहिये श्री कृष्णचन्द्र जी ने कहा-हे राजन् ! ध्यान पूर्वक इसकी भी कथा सुनो।

ये मैया मेरी है, सबसे बोल देंगे हम (Ye Maiya Meri Hai Sabse Bol Denge Hum)

ये मैया मेरी है,
सबसे बोल देंगे हम,

मेरी विनती यही है! राधा रानी(Meri Binti Yahi Hai Radha Rani)

मेरी विनती यही है राधा रानी
कृपा बरसाए रखना

कदम कदम पर रक्षा करता (Kadam Kadam Par Raksha Karta)

कदम कदम पर रक्षा करता,
घर घर करे उजाला उजाला,