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श्याम तेरा कीर्तन जो, मन से कराता है: भजन (Shyam Tera Kirtan Jo Maan Se Karata Hai)

श्याम तेरा कीर्तन जो,

मन से कराता है,

श्याम तेरा किर्तन जो,

मन से कराता है,

सुनने को सांवरिया,

खुद लीले चढ़ आता है,

श्याम तेरा किर्तन जो,

मन से कराता है ॥


ऐसे नहीं कहते है,

हारे का सहारा लोग,

हर एक मुसीबत से,

मेरा श्याम ही बचाता है,

श्याम तेरा किर्तन जो,

मन से कराता है ॥


कैसे मैं गिनाऊँ तुम्हे,

एहसान कितने है,

अपने दीवानों को,

वो तो गले से लगाता है,

श्याम तेरा किर्तन जो,

मन से कराता है ॥


श्याम तेरा कीर्तन जो,

मन से कराता है,

श्याम तेरा किर्तन जो,

मन से कराता है,

सुनने को सांवरिया,

खुद लीले चढ़ आता है,

श्याम तेरा किर्तन जो,

मन से कराता है ॥

विंध्याचल की विंध्यवासिनी, नमन करो स्वीकार माँ (Vindhyachal Ki Vindhyavasini Naman Karo Swikar Maa)

विंध्याचल की विंध्यवासिनी,
नमन करो स्वीकार माँ,

मैं तो अपने श्याम की दीवानी बन जाउंगी - भजन (Main To Apne Shyam Ki Diwani Ban Jaungi)

मैं तो अपने श्याम की,
दीवानी बन जाउंगी,

मासिक शिवरात्रि पर शिव चालीसा पाठ

हिंदू पंचाग में प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी 14वें दिन मासिक शिवरात्रि के मनाई जाती है। इस विशेष दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है।

अथ तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Tantroktam Ratri Suktam)

तन्त्रोक्तम् रात्रि सूक्तम् यानी तंत्र से युक्त रात्रि सूक्त का पाठ कवच, अर्गला, कीलक और वेदोक्त रात्रि सूक्त के बाद किया जाता है।