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Hey Bhole Baba Hey Bhandari (हे भोले बाबा हे भंडारी)

हे भोले बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा,

डमरू वाला दीनदयाला,

डमरू वाला दीनदयाला,

ध्यान धरूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे ध्यान धरूँ तेरा,

हे भोलें बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा ॥


जीवन से तुम दुःख के कांटे,

शंकर अब मिटा दो,

मैं भी हंसना गाना चाहूँ,

सुख के फूल खिला दो,

हे महादेवा हाथ जोड़ के,

हे महादेवा हाथ जोड़ के,

वंदन करूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे वंदन करूँ तेरा,

हे भोलें बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा ॥


मारग से फिरूं भटका भटका,

राह सही दिखला दो,

रस्ता मुश्किल धुंधली मंजिल,

ज्ञान का दीप जला दो,

उमापति महाकाल महेश्वर,

उमापति महाकाल महेश्वर,

दास रहूं तेरा,

ओ शम्भू मेरे दास रहूं तेरा,

हे भोलें बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा ॥


जीवन का आधार तू ही है,

तू ही मेरा सहारा,

प्यारा लगता बाबा मुझको,

चौखट तेरा द्वारा,

गंगाधर मेरे शिव शंकर,

गंगाधर मेरे शिव शंकर,

बालक हूँ मैं तेरा,

ओ शम्भू मेरे बालक हूँ मैं तेरा,

हे भोलें बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा ॥


हे भोले बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा,

डमरू वाला दीनदयाला,

डमरू वाला दीनदयाला,

ध्यान धरूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे ध्यान धरूँ तेरा,

हे भोलें बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा ॥

रामनवमी पर रामलला की पूजा विधि

देशभर में रामनवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इसलिए, राम भक्त पूरे साल इस दिन का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करते हैं। यह हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।

कब है बसंत पंचमी 2025?

माघ शुक्ल की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का उत्सव मनाया जाता है। सनातन धर्म के लोगों के लिए ये दिन बहुत खास होता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन ज्ञान की देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं। इसलिए इस दिन माता सरस्वती की पूजा की जाती है।

बााबा नेने चलियौ हमरो अपन नगरी (Baba Nene Chaliyo Hamaro Apan Nagari)

बााबा नेने चलियौ हमरो अपन नगरी,
बाबा लेले चलियौ हमरो अपन नगरी,

जय गणेश गणनाथ दयानिधि (Jai Ganesh Gananath Dayanidhi)

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

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