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तेरे चरणों में सर को, झुकाता रहूं(Tere Charno Mein Sir Ko Jhukata Rahu)

तेरे चरणों में सर को,

झुकाता रहूं,

तू बुलाता रहे,

और मैं आता रहूं ॥


मैंने बचपन से,

तुझको ही जाना है,

तेरा मेरा ये,

रिश्ता पुराना है,

तुझे दिल की,

हकीकत सुनाता रहूं,

तू बुलाता रहे,

और मैं आता रहूं ॥


तूने अपना बनाया,

ये एहसान है,

तेरी किरपा से ही,

मेरी पहचान है,

तेरे भक्तो से,

प्रेम बढाता रहूं,

तू बुलाता रहे,

और मैं आता रहूं ॥


‘बिन्नू’ कहता है,

प्रभु धन्यवाद तुझे,

तुम बुलाया करो,

श्याम दर पे मुझे,

यूँ ही तेरे तराने,

मैं गाता रहूं,

तू बुलाता रहे,

और मैं आता रहूं ॥


तेरे चरणों में सर को,

झुकाता रहूं,

तू बुलाता रहे,

और मैं आता रहूं ॥

गुरू प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। हर महीने दो प्रदोष व्रत और पूरे साल में 24 व्रत होते हैं।

पूरब से जब सूरज निकले (Purab Se Jab Suraj Nikle)

पूरब से जब सूरज निकले,
सिंदूरी घन छाए,

महालक्ष्मी जाप करो (Mahalaxmi Jaap Karo)

नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते
शंख चक्र गदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते

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जय भोले शंकर जय गंगाधारी,
देवो के देवा हे महादेवा,

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