प्रभु के चरणों से सच्चा प्यार: भजन (Parbhu Ke Charno Se Sachha Pyar)

प्रभु के चरणों से गर सच्चा प्यार किसी को हो जाये,

दो चार सहर की बात ही क्या संसार उसी का हो जाये ॥


रावण ने राम से बैर किया उसे अब भी जलाया जाता है,

बन भक्त विभीषण शरण गए घर बार उसी का हो जाए,

प्रभु के चरणों से गर सच्चा प्यार किसी को हो जाये ॥


गणिका ने कौन से वेद पढे कुब्जा क्या रूप की रानी थी,

जिसमे छल कपट का लेश नहीं घनश्याम उसी का हो जाए,

प्रभु के चरणों से गर सच्चा प्यार किसी को हो जाये ॥


माया के पुजारी सुन लो तुम उस प्रेम दीवानी मीरा से,

गर प्रेम हो मीरा सा मन में मोहन तेरा भी हो जाए,

प्रभु के चरणों से गर सच्चा प्यार किसी को हो जाये ॥


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विश्वेश्वर व्रत कथा

सनातन धर्म में प्राचीन काल से ही विश्वेश्वर व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है। इस व्रत को शिव जी की कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से रखा जाता है।

सामा-चकेवा और मुढ़ी-बतासे

सामा-चकेवा मिथिलांचल में भाई-बहन के प्रेम और अपनत्व का प्रतीक है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल सप्तमी से कार्तिक पूर्णिमा तक नौ दिन चलता है।

ओम अनेक बार बोल (Om Anek Bar Bol Prem Ke Prayogi)

ओम अनेक बार बोल, प्रेम के प्रयोगी।
है यही अनादि नाद, निर्विकल्प निर्विवाद।

मैया बधाईं है बधाईं है (Maiya Badhai Hai Badhai Hai)

मैया बधाई है बधाई है,
बाबा बधाई है बधाई है,

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