सूरत बड़ी है प्यारी माँ की (Surat Badi Hain Pyari Maa Ki)

सूरत बड़ी है प्यारी माँ की,

मूरत की क्या बात है,

सर पर सोहे मुकुट सुनहरा,

त्रिशूल चक्र भी हाथ है,

सज धज कर बैठी हो मैया,

अजब निराली ठाट है,

वाह वाह क्या बात है,

वाह वाह क्या बात है ॥


छवि तुम्हारी ऐसी मैया,

दूजी कोई और नहीं,

तीन लोक तेरे जैसा,

दूजा माँ सिरमौर नहीं,

लाल लाल मेहंदी ज्वाला जी,

रची तुम्हारे हाथ है,

वाह वाह क्या बात है,

वाह वाह क्या बात है ॥


हर एक रूप में प्यारी लगती,

सबका चित्त चुराती हो,

भक्त तुम्हारा भजन करे तो,

मन ही मन मुस्काती हो,

अंबर से होती है तुझपे,

फूलो की बरसात है,

वाह वाह क्या बात है,

वाह वाह क्या बात है ॥


आज तुम्हारे इस दर्शन को,

सेवक तुम्हारे आये है,

चोखानी के तुमने ही तो,

बिगड़े काज बनाये है,

सिंघ सवारी करती मैया,

अजब निराली शान है,

वाह वाह क्या बात है,

वाह वाह क्या बात है ॥


सूरत बड़ी है प्यारी माँ की,

मूरत की क्या बात है,

सर पर सोहे मुकुट सुनहरा,

त्रिशूल चक्र भी हाथ है,

सज धज कर बैठी हो मैया,

अजब निराली ठाट है,

वाह वाह क्या बात है,

वाह वाह क्या बात है ॥

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माघ महीने में कब और क्यों मनाई जाती है कुंभ संक्रांति?

आत्मा के कारक सूर्य देव हर महीने एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करते हैं। सूर्य देव के इस राशि परिवर्तन को ही संक्रांति कहते हैं। हर संक्रांति का अपना खास महत्व होता है और इसे धूमधाम से मनाया जाता है।

धन जोबन और काया नगर की (Dhan Joban Aur Kaya Nagar Ki)

धन जोबन और काया नगर की,
कोई मत करो रे मरोर ॥

हर बार तेरे दर पे, नव गीत सुनाएंगे (Har Baar Tere Dar Pe Nav Geet Sunayenge)

हर बार तेरे दर पे,
नव गीत सुनाएंगे,

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे संकटों को दूर करने और सफलता प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2025 विशेष रूप से चैत्र मास में मनाई जाती है और इस दिन गणपति बप्पा की विधिपूर्वक पूजा की जाती है।

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