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आजा.. नंद के दुलारे हो..हो..: भजन (Ajaa Nand Ke Dulare)

आजाआ... ओओओ...

आजा.. नंद के दुलारे हो..हो..

रोवे अकेली मीरा..आ..

आजा.. नंद के दुलारे हो..हो..

रोवे अकेली मीरा..आ..


बालक सी न ब्याह करवाया

तेरे संग ब्याही हो..हो..

पिहर छोड़ सासरे आगी

लदी कुल क शाही हो..हो.. ॥

आजा.. नंद के दुलारे हो..हो..॥


रोम रोम मे रम होया से..

नही रोम टेन न्यारा हो

दुष्टों का संघार किया

बन्यां भक्तो का तू प्यारा हो.. ॥

रोम रोम मे रम होया से.. ॥


जंग जोवे अकेली मीरा..आ.. ॥

आजा.. नंद के दुलारे हो..हो.. ॥


आदम देह के चोले संग

दूत रहें सयम हो.. हो..

सतरंग सेज बिछा रखी से

लगे गाळीचे गम के हो..हो.. ॥

आदम देह के चोले संग ॥


सोवे अकेली मीरा..आ.. ॥

आजा.. नंद के दुलारे हो..हो.. ॥


माँगेराम राम ने टोहेवे

कोन्यों पाया दर पे हो..हो..

लख़मिचंद सुरग मे जालिये

फेर भी बोझा सिर पे हो..हो..॥

माँगेराम राम ने टोहेवे ॥


ढोवे अकेली मीरा..आ.. ॥

आजा.. नंद के दुलारे हो..हो.. ॥


आजाआ... ओओओ...

आजा.. नंद के दुलारे हो..हो..

रोवे अकेली मीरा..आ..

आजा.. नंद के दुलारे हो..हो..

रोवे अकेली मीरा..आ..


मासिक दुर्गाष्टमी उपाय

मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। सनातन धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी का एक विशेष महत्व है, यह दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना का होता है।

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फाल्गुन माह प्रदोष व्रत उपाय

फाल्गुन मास में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। फाल्गुन मास में प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

माता चंडी की पूजा विधि

मां चंडी जो विशेष रूप से शक्ति, दुर्गा और पार्वती के रूप में पूजी जाती हैं। उनका रूप रौद्र और उग्र होता है, और वे शत्रुओं का नाश करने वाली, बुराई का विनाश करने वाली और संसार को शांति देने वाली देवी के रूप में पूजा जाती हैं।

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