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जाना है मुझे माँ के दर पे (Jana Hai Mujhe Maa Ke Dar Pe)

जाना है मुझे माँ के दर पे,

सुनो बाग के माली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली,

पहन जिसे खुश हो जाए,

मेरी मैया शेरावाली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली ॥


भांत भांत के फूल और कलियाँ,

चुन बगिया से लाना,

श्रद्धा के धागे में प्रेम की,

सुई से फूल सजाना,

मुंह माँगा तुझे दाम मैं दूंगा,

मुंह माँगा तुझे दाम मैं दूंगा,

बात नहीं डर वाली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली ॥


गेंदा गुलाब चमेली चम्पा,

मरुआ और गुलद्वारी,

सूरजमुखी रात की रानी,

मोतिया जूही कचनारी,

संदल कमल मोगरा संग में,

संदल कमल मोगरा संग में,

लाजवंती मतवाली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली ॥


पहने जब माला मेरी माँ,

सुख अमृत बरसा दे,

‘कँवल सरल’ से भक्तो की,

सोई तक़दीर जगा दे,

खिल जाए ‘लख्खा’ के मन की,

खिल जाए ‘लख्खा’ के मन की,

मुरझाई जो डाली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली ॥


जाना है मुझे माँ के दर पे,

सुनो बाग के माली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली,

पहन जिसे खुश हो जाए,

मेरी मैया शेरावाली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली ॥

भोलेनाथ है वो मेरे, भोलेनाथ हैं (Bholenath Hai Vo Mere Bholenath Hai)

हर इक डगर पे हरपल,
जो मेरे साथ हैं,

चंद्र दर्शन का महत्व क्या है

मार्गशीर्ष माह हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस माह में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति के जीवन में शांति और समृद्धि का आगमन होता है। चंद्र देव को मन का कारक और मानसिक संतुलन का प्रतीक माना गया है।

चलो दर्शन को मेहंदीपुर चलिए (Chalo Darshan Ko Mehandipur Chaliye)

चलो दर्शन को मेहंदीपुर चलिए,
जहाँ बालाजी का दरबार है,

अन्नपूर्णा जयंती के दिन उपाय

सनातन धर्म में माता अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना गया है। इसलिए, हर साल मार्गशीर्ष माह में अन्नपूर्णा जयंती मनायी जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता पार्वती धरती पर मां अन्नपूर्णा के रूप में अवतरित हुई थीं।

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