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जाना है मुझे माँ के दर पे (Jana Hai Mujhe Maa Ke Dar Pe)

जाना है मुझे माँ के दर पे,

सुनो बाग के माली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली,

पहन जिसे खुश हो जाए,

मेरी मैया शेरावाली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली ॥


भांत भांत के फूल और कलियाँ,

चुन बगिया से लाना,

श्रद्धा के धागे में प्रेम की,

सुई से फूल सजाना,

मुंह माँगा तुझे दाम मैं दूंगा,

मुंह माँगा तुझे दाम मैं दूंगा,

बात नहीं डर वाली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली ॥


गेंदा गुलाब चमेली चम्पा,

मरुआ और गुलद्वारी,

सूरजमुखी रात की रानी,

मोतिया जूही कचनारी,

संदल कमल मोगरा संग में,

संदल कमल मोगरा संग में,

लाजवंती मतवाली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली ॥


पहने जब माला मेरी माँ,

सुख अमृत बरसा दे,

‘कँवल सरल’ से भक्तो की,

सोई तक़दीर जगा दे,

खिल जाए ‘लख्खा’ के मन की,

खिल जाए ‘लख्खा’ के मन की,

मुरझाई जो डाली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली ॥


जाना है मुझे माँ के दर पे,

सुनो बाग के माली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली,

पहन जिसे खुश हो जाए,

मेरी मैया शेरावाली,

मेरी माँ के लिए,

माला पिरो दे अजब निराली ॥

वैकुंठ चतुर्दशी पर पितृ तर्पण

हिंदू धर्म में वैकुंठ चतुर्दशी का पर्व विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है।

सूर्य मंत्र

ॐ सूर्याय नमः
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकरः

अब दया करो हे भोलेनाथ (Ab Daya Karo He Bholenath)

अब दया करो हे भोलेनाथ,
मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

गोगा नवमी (Goga Navami)

आज मनाई जा रही है गोगा नवमी, संतान सुख की प्राप्ति के लिए पूजे जाते हैं गोगा देव, सर्पभय से मिलती है मुक्ति

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