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बीच भंवर में फसी मेरी नैया (Beech Bhawar Mein Fasi Meri Naiya)

बीच भंवर में फसी मेरी नैया,

तुम्ही हो खिवैया माँ,

तुम्ही हो खिवैया ॥


तेरा ही भरोसा माँ,

तेरा ही सहारा,

तुम्ही को पुकारा माँ,

तुम्ही को पुकारा,

तेरे ही भरोसे पे,

चले मेरी नैया,

तुम्ही हो खिवैया माँ,

तुम्ही हो खिवैया ॥


बडी तेज आंधी,

तूफानों ने घेरा,

बता कुन है मेरा माँ,

यहाँ कुन है मेरा,

खड़ी क्या हुई के,

चली आ तू मैया,

तुम्ही हो खिवैया माँ,

तुम्ही हो खिवैया ॥


सुनी जब भगत की,

झट दौड़ी आई,

पतवार हाथों ले,

किनारे लगाई,

बडी ही दयालु है,

‘प्रवीण’ मेरी मैया,

तुम्ही हो खिवैया माँ,

तुम्ही हो खिवैया ॥


बीच भंवर में फसी मेरी नैया,

तुम्ही हो खिवैया माँ,

तुम्ही हो खिवैया ॥

माँ तेरे लाल बुलाए आजा(Maa Tere Lal Bulaye Aaja)

माँ तेरे लाल बुलाए आजा,
सुनले भक्तो की सदाए आजा,

आई सिंघ पे सवार (Aayi Singh Pe Swar)

आई सिंघ पे सवार,
मईया ओढ़े चुनरी,

कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना! (Kaise Jiun Main Radha Rani Tere Bina)

कैसे जिऊ मैं राधा रानी तेरे बिना,
मेरा मन ही ना लागे तुम्हारे बिना॥

रवि प्रदोष व्रत के उपाय

हिंदू धर्म में, प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत मनाया जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, फरवरी माह का पहला प्रदोष व्रत 9 फरवरी को मनाया जाएगा। सप्ताह के सातों दिनों में से जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है उसी के नाम पर उस प्रदोष का नाम रखा जाता है।

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