नवीनतम लेख

बोलो जय जयकारे (Bolo Jay Jaikare)

ऊँचे ऊँचे भवनों बैठी रुप अनेकों धारे,
चरण चाकरी कर लो भैया,
हो जाए वारे न्यारे,
बोलो जय जयकारे,
माँ के बोलो जय जयकारे ॥

शेर पर मैया चढ़ी चढ़ी,
ज्योति सवाई बड़ी बड़ी,
आने वाली है मेरी,
माई आने वाली है,
लाल चुनरिया जड़ी जड़ी,
देखी दुनिया खड़ी खड़ी,
शेरोवाली मैहरोवाली,
माई लाटावाली है,
कलकत्ते काली,
जोतावाली माता ज्वाला,
जम्मू में माता वैष्णो वाली है,
विंध्यवासिनी विंध्याचल की,
गुवाहाटी कामाख्या,
मनसा माता नैना देवी,
शैलसुता माँ साख्या,
बोलो जय जयकारे,
माँ के बोलो जय जयकारे ॥

दयालु बड़ी माँ दयालु बड़ी,
माता करुणामयी कंजका माँ,
सबकी झोली भरे सारे संकट हरे,
माई जगदम्बिके अंबिके माँ,
‘लहरी’ न जाने क्या बखाने,
यही माने मनसा माँ,
मंशा पुरने वाली है,
जिस घर होवे पूजा माँ की,
खुशियां खुशियां बरसे,
आज तलक खाली ना लौटा,
कोई माँ के दर से,
बोलो जय जयकारे,
माँ के बोलो जय जयकारे ॥

ऊँचे ऊँचे भवनों बैठी रुप अनेकों धारे,
चरण चाकरी कर लो भैया,
हो जाए वारे न्यारे,
बोलो जय जयकारे,
माँ के बोलो जय जयकारे ॥
तेरे स्वागत में मैया जी, मैंने पलके बिछाई है (Tere Swagat Mein Maiya Ji Maine Palke Bichayi Hai)

तेरे स्वागत में मैया जी,
मैंने पलके बिछाई है,

खबर मेरी ले लेना, उज्जैन के महाकाल(Khabar Meri Le Lena Ujjain Ke Mahakal)

खबर मेरी ले लेना,
उज्जैन के महाकाल ॥

मेरा संकट कट गया जी (Mera Sankat Kat Gaya Ji)

मेरा संकट कट गया जी,
मेहंदीपुर के दरबार में,

बैंगन छठ की कहानी क्या है

हर साल बैंगन छठ या चंपा षष्ठी का यह व्रत मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। इसे बैंगन छठ के नाम से भी जानते हैं। दरअसल, इस पूजा में बैंगन चढ़ाते हैं इसलिए इसे बैंगन छठ कहा जाता है।

यह भी जाने