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गल मोत्यां को हार, सिर चुनड़ चमकदार (Gal Motiyan Ko Haar Sir Chunad Chamakdar)

गल मोत्यां को हार,

सिर चुनड़ चमकदार,

थे कर सोलह श्रृंगार,

माँ बनड़ी सी लागो जी,

माँ बनड़ी सी लागो जी ॥


थारे हाथा सोणी चंगी,

माँ मेहंदी रची सुरंगी,

चुडले की खन खन न्यारी,

झांकी थारी सतरंगी,

मन मेरो मोह लियो है,

थारी पायल की झंकार,

गल मोत्या को हार,

सिर चुनड़ चमकदार,

थे कर सोलह श्रृंगार,

माँ बनड़ी सी लागो जी,

माँ बनड़ी सी लागो जी ॥


थारे माथे बिंदिया चमके,

नथनी में हीरो दमके,

थारे देख देख कर दादी,

भक्ता को मनडो हरखे,

जादू सो चढ़ गयो है,

मैं भूली माँ घर बार,

गल मोत्या को हार,

सिर चुनड़ चमकदार,

थे कर सोलह श्रृंगार,

माँ बनड़ी सी लागो जी,

माँ बनड़ी सी लागो जी ॥


थाने ‘स्वाति’ निरखन ताई,

थारे मन्दरिये में आई,

कवे ‘हर्ष’ देख कर थाने,

सुध बुध सारी बिसराई,

पलभर ना हटे निजरा,

मैं निरखु बारम्बार,

गल मोत्या को हार,

सिर चुनड़ चमकदार,

थे कर सोलह श्रृंगार,

माँ बनड़ी सी लागो जी,

माँ बनड़ी सी लागो जी ॥


गल मोत्यां को हार,

सिर चुनड़ चमकदार,

थे कर सोलह श्रृंगार,

माँ बनड़ी सी लागो जी,

माँ बनड़ी सी लागो जी ॥

भूतड़ी अमावस्या के उपाय

चैत्र मास की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या भी कहते हैं। यह तिथि पितृ तर्पण, श्राद्ध और खास उपायों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

नवरात्री का त्यौहार आया (Navratri Ka Tyohar Aaya)

नवरात्री का त्यौहार आया,
वैष्णो मैया ने हमको बुलाया ॥

मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे(Meri Jholi Chhoti Padgayi Re Itna Diya Meri Mata)

मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे,
इतना दिया मेरी माता।

लक्ष्मी जयंती की मुहूर्त और तिथि

लक्ष्मी जयंती को मां लक्ष्मी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस तिथि पर मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था।

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