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हर बार तेरे दर पे, नव गीत सुनाएंगे (Har Baar Tere Dar Pe Nav Geet Sunayenge)

हर बार तेरे दर पे,

नव गीत सुनाएंगे,

ढांढण वाली सुन ले,

तेरी महिमा गाएंगे,

हर बार तेरे दर पें,

नव गीत सुनाएंगे ॥


तुझसे मिलने से हमें,

रोकोगी भला कैसे,

कदमों में लिपट जाए,

वृक्षों से लता जैसे,

सपनों में मिली माँ को,

हम सामने पाएंगे,

हर बार तेरे दर पें,

नव गीत सुनाएंगे ॥


होगी तृष्णा पूरी,

प्यासी इन अखियन की,

माथे से लगा लेंगे,

धूलि तेरे चरणन की,

चरणामृत लेकर माँ,

हम भव तर जाएंगे,

हर बार तेरे दर पें,

नव गीत सुनाएंगे ॥


सदियों से सदा हमने,

तेरी आस लगाई है,

पागल मनवा कहता,

माँ तुमको भुलाई है,

पाकर के तेरे दर्शन,

मन को समजाएंगे,

हर बार तेरे दर पें,

नव गीत सुनाएंगे ॥


चुनकर वन उपवन से,

पुष्पों की मधुर लड़ियाँ,

एक हार बनाया है,

बीती है कई घड़ियाँ,

यह पुष्प भजन माला,

तुझे भेट चढ़ाएंगे,

हर बार तेरे दर पें,

नव गीत सुनाएंगे ॥


हर बार तेरे दर पे,

नव गीत सुनाएंगे,

ढांढण वाली सुन ले,

तेरी महिमा गाएंगे,

हर बार तेरे दर पें,

नव गीत सुनाएंगे ॥


जानकी स्तुति - भई प्रगट कुमारी (Janaki Stuti - Bhai Pragat Kumari)

भई प्रगट कुमारी
भूमि-विदारी

कब है अखुरथ संकष्टी चतुर्थी

पौष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हर वर्ष अखुरथ संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। दृक पंचांग के अनुसार दिसंबर माह के 18 तारीख को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी।

मैया कृपा करदो झोली मेरी भरदो (Maiya Kripa Kar Do Jholi Meri Bhar Do)

मैया कृपा करदो,
झोली मेरी भरदो ।

मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए (Mujhe Tera Sahara Sada Chahiye)

आसरा इस जहाँ का मिले न मिले,
मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए ॥

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