नवीनतम लेख

जरी की पगड़ी बांधे, सुंदर आँखों वाला (Jari Ki Pagri Bandhe Sundar Ankhon Wala)

जरी की पगड़ी बांधे,

सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥


कानों में कुण्डल साजे,

सिर मोर मुकुट विराजे,

सखियाँ पगली होती,

जब जब होठों पे बंसी बाजे,

हैं चंदा यह सांवरा,

तारे हैं ग्वाल बाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥


जरी की पगड़ी बांधे,

सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥


लट घुंघराले बाल,

तेरे कारे कारे गाल,

सुन्दर श्याम सलोना,

तेरी टेढ़ी मेढ़ी चाल,

हवा में सर सर करता,

तेरा पीताम्बर मतवाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥


जरी की पगड़ी बांधे,

सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥


मुख पे माखन मलता,

तू बल घुटने के चलता,

देख यशोदा भाग्य को,

देवों का मन भी जलता,

माथे पे तिलक है सोहे,

आँखों में काजल डारा,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥


जरी की पगड़ी बांधे,

सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥


तू जब बंसी बजाए,

तब मोर भी नाच दिखाए,

यमुना में लहरें उठती,

और कोयल कू कू गाए,

हाथ में कँगन पहने,

और गल वैजंती माला

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥


जरी की पगड़ी बांधे,

सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी,

कितना लागे प्यारा,

जरी की पगड़ी बाँधे ॥

करवा और उसके सात भाइयों की कथा

करवा चौथ के एक अन्य कथा के अनुसार एक समय में किसी नगर में एक साहूकार अपनी पत्नी 7 पुत्रों, 7 पुत्रवधुओं तथा एक पुत्री के साथ निवास करता था।

पुत्रदा एकादशी 2025

पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा या वैकुंठ एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पुत्र या संतान प्राप्ति के लिए उपाय करने से सफलता मिलती है। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

विष्णुशयनी एकादशी एवं चातुर्मास व्रत (Vishnushayanee Ekaadashee Evan Chaaturmaas Vrat)

इस एकादशी का नाम विष्णुशयनी भी है। इसी दिन विष्णुजी का व्रत एवं चातुर्मास्य व्रत प्रारम्भ करना विष्णु पुराण से प्रकट होता है।

अखुरथ संकष्टी चतुर्थी के यम-नियम

हर साल पौष महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि अखुरथ संकष्टी चतुर्थी होती है। हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी काफ़ी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

यह भी जाने