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जो सुमिरत सिधि होइ (Jo Sumirat Siddhi Hoi)

श्री रामायण प्रारम्भ स्तुति,

जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन ॥

करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन ॥ 1 ॥


मूक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन ॥

जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन ॥ 2 ॥


नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन ॥

करउ सो मम उर धाम सदा छीरसागर सयन ॥ 3 ॥


कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन ॥

जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन ॥ 4 ॥


बंदउ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि ॥

महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर ॥ 5 ॥

होलाष्टक पर भूलकर भी ना करें ये गलती

होलाष्टक की तिथि शुभ कार्य के लिए उचित नहीं मानी जाती है, इन तिथियों के अनुसार इस समय कुछ कार्य करने से सख्त मनाही होती है। क्योंकि इन्हीं दिनों में भक्त प्रह्लाद पर उनके पिता हिरण्यकश्यप ने बहुत अत्याचार किया था।

ओ मेरे गोपाल कन्हैया, मोहन मुरली वाले (O Mere Gopal Kanhaiya Mohan Murliwale)

ओ मेरे गोपाल कन्हैया,
मोहन मुरली वाले,

कब मनाई जाएगी धनु संक्रांति

सनातन धर्म में भगवान सूर्य को ग्रहों का राजा बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि जिसकी राशि में भगवान सूर्य शुभ होते हैं, उसका सोया हुआ भाग्य भी जाग उठता है।

कार्तिगाई दीपम उत्सव से जुड़ी पौराणिक कथा

कार्तिगाई दीपम उत्सव दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो भगवान कार्तिकेय और शिव को समर्पित है। यह उत्सव तमिल माह कार्तिगाई की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जो उत्तर भारतीय कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि को आयोजित होता है।