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जो सुमिरत सिधि होइ (Jo Sumirat Siddhi Hoi)

श्री रामायण प्रारम्भ स्तुति,

जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन ॥

करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन ॥ 1 ॥


मूक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन ॥

जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन ॥ 2 ॥


नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन ॥

करउ सो मम उर धाम सदा छीरसागर सयन ॥ 3 ॥


कुंद इंदु सम देह उमा रमन करुना अयन ॥

जाहि दीन पर नेह करउ कृपा मर्दन मयन ॥ 4 ॥


बंदउ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि ॥

महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर ॥ 5 ॥

रक्षाबंधन की पूजा विधि

सनातन हिंदू धर्म के अनुयायी हर साल सावन माह की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाते हैं। इस साल रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। हालांकि, इस दिन भद्रा काल का साया भी रहेगा, जिसे अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं होता।

भोला नही माने रे नहीं माने (Bhola Nai Mane Re Nahi Mane)

भोला नही माने रे नहीं माने,
मचल गए नचबे को,

मैं सहारे तेरे, श्याम प्यारे मेरे (Main Sahare Tere, Shyam Pyare Mere)

मैं सहारे तेरे,
श्याम प्यारे मेरे,

साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम(Sanso Ki Mala Pe Simru Main Pee Ka Naam)

साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,