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उलझ मत दिल बहारो में (Ulajh Mat Dil Baharo Men)

उलझ मत दिल बहारो में,

बहारो का भरोसा क्या,

उलझ मत दिल बहारो में,

बहारो का भरोसा क्या,

सहारे छूट जाते हैं,

सहरों का बरोसा क्या

तू संबल नाम का लेकर,

किनारों से किनारा कर

किनारे टूट जाते हैं,

किनारो का भरोसा क्या


उलझ मत दिल बहारो में,

बहारो का भरोसा क्या,

सहारे छूट जाते हैं,

सहरों का बरोसा क्या


पथिक तू अक्लमंदी पर,

बिचारो पर ना इतराना

कहाँ कब मन बिगड़ जाये,

बिचारो का भरोसा क्या


उलझ मत दिल बहारो में,

बहारो का भरोसा क्या,

सहारे छूट जाते हैं,

सहरों का बरोसा क्या


उलझ मत दिल बहारो में,

बहारो का भरोसा क्या,

सहारे छूट जाते हैं,

सहरों का बरोसा क्या

नटराज स्तुति पाठ

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शंकर की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से घर में खुशहाली आती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

खाटू का राजा मेहर करो(Khatu Ka Raja Mehar Karo)

थासु विनती कराहाँ बारंबार,
सुनो जी सरकार,

प्रभु! स्वीकारो मेरे परनाम (Prabhu Sweekaro Mere Paranam)

सुख-वरण प्रभु, नारायण हे!
दु:ख-हरण प्रभु, नारायण हे!

ऐसो रास रच्यो वृन्दावन (Aiso Ras Racho Vrindavan)

ऐसो रास रच्यो वृन्दावन,
है रही पायल की झंकार ॥