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माँ का है जगराता, माँ को आज मनाएंगे(Maa Ka Hai Jagrata Maa Ko Aaj Manayenge)

माँ का है जगराता,

माँ को आज मनाएंगे,

जय माता दी बोल के,

सब जयकारे लाएंगे ॥


दिन आज खुशी का आया है,

माँ का दरबार सजाया है,

माँ के भक्तों माँ की महिमा,

सबको सुनाएंगे,

जय माता दी बोल के,

सब जयकारे लाएंगे ॥


ये वारे न्यारे करती है,

खुशियों से झोली भारती है,

माँ के दर से भक्त झोलियां,

भर ले जाएंगे,

जय माता दी बोल के,

सब जयकारे लाएंगे ॥


भक्तो ने धूम मचाई है,

नच नच के धूल उड़ाई है,

‘खन्ना’ माँ की महिमा गाके,

माँ को रिझाएंगे,

जय माता दी बोल के,

सब जयकारे लाएंगे ॥


माँ का है जगराता,

माँ को आज मनाएंगे,

जय माता दी बोल के,

सब जयकारे लाएंगे ॥

सभकेर सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे (Sabker Sudhi Aahan Lai Chhi He Ambe)

सभकेर सुधि अहाँ लै छी हे अम्बे
हमरा किए बिसरै छी हे

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

उत्पन्ना एकादशी की पौराणिक कथा मां एकादशी के जन्म से संबंधित है। इसमें ये बताया गया है कि उन्होंने भगवान विष्णु को एक राक्षस से कैसे बचाया। दरअसल सतयुग में एक मुरा नाम का एक राक्षस था।

मेरी छोटी सी है नाव(Meri Chhoti Si Hai Naav)

मेरी छोटी सी है नाव,
तेरे जादू भरे पॉंव,

पापमोचनी एकादशी के उपाय

पापमोचनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है।

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