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ओ मैया तेरी रहमतों ने, ये करिश्मा किया (O Maiya Teri Rehmaton Ne ye Karishma Kiya)

ओ मैया तेरी रहमतों ने,

ये करिश्मा किया,

छोटी पड़ गई झोली,

तूने इतना दिया ॥


अपना बनाया,

गले से लगाया,

दे दी हमें अपनी,

ममता की छाया,

ओ मैया बुझने दिया ना,

आस वाला दीया,

छोटी पड़ गई झोली,

तूने इतना दिया ॥


पुकारा तुझे हमने,

जब जिस घड़ी है,

माँ अपने भवनों से,

तू चल पड़ी है,

हमें लड़खड़ाने से,

पहले संभाला,

सदा माँ दुखो के,

भंवर से निकाला,

माँ तेरे हाथ में,

जब मेरा हाथ है,

छू ले मुझको कहाँ,

दुःख की औकात है,

ओ मैया तेरी दया का,

हमने अमृत पिया,

छोटी पड़ गई झोली,

तूने इतना दिया ॥


हाथ तेरा सदा माँ,

सर पे रहे,

सर हमेशा माँ तेरे,

दर पे रहे,

ओ मैया हर साँस हमने,

नाम तेरा लिया,

छोटी पड़ गई झोली,

तूने इतना दिया ॥


ओ मैया तेरी रहमतों ने,

ये करिश्मा किया,

छोटी पड़ गई झोली,

तूने इतना दिया ॥

क्यों खास है डोल पूर्णिमा

डोल पूर्णिमा का त्यौहार मुख्य रूप से बंगाल, असम, त्रिपुरा, गुजरात, बिहार, राजस्थान और ओडिशा में मनाया जाता है। इस दिन राधा-कृष्ण की मूर्ति को पालकी पर बिठाया जाता है और भजन गाते हुए जुलूस निकाला जाता है।

आना हो श्री गणेशा, मेरे भी घर में आना (Aana Ho Shri Ganesha Mere Bhi Ghar Mein Aana)

आना हो श्री गणेशा,
मेरे भी घर में आना,

मन की तरंग मार लो(Man Ki Tarang Mar Lo Bas Ho Gaya Bhajan)

मन की तरंग मार लो, बस हो गया भजन।
आदत बुरी संवार लो, बस हो गया भजन॥

भोला शंकर बने मदारी (Bhola Shankar Bane Madari)

भोला शंकर बने मदारी,
डमरू दशरथ द्वार बजायो,

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