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ओढ़ो जी ओढ़ो दादी, म्हारी भी चुनरिया (Odhoji Odho Dadi Mhari Bhi Chunariya)

ओढ़ो जी ओढ़ो दादी,

म्हारी भी चुनरिया,

शान से ल्याया थारा,

टाबरिया थारा बालकिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥


राचणी मेहंदी थारे,

हाथां में लगावा,

गजरो बनावा थारे,

जुड़े में सजावा,

फूल मंगाया बढ़िया बढ़िया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥


दादी जी आओ थारे,

भोग लगावा,

हलवा पूड़ी मेवा का,

थाल सजावा,

खीर बनवाई दादी केसरिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥


चुनड़ी ओढ़ाया म्हारो,

मान बढ़ेगो,

और भी थारो,

सिणगार खिलेगो,

‘सोनू’ सरावेगी या सारी दुनिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥


ओढ़ो जी ओढ़ो दादी,

म्हारी भी चुनरिया,

शान से ल्याया थारा,

टाबरिया थारा बालकिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥

मार्गशीर्ष माह में कब-कब पड़ेंगे प्रदोष व्रत?

हर माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। यह व्रत पूर्ण रूप से भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है।

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है भजन (Chalo Bulawa Aaya Hai Mata Ne Bulaya Hai Bhajan)

नवदुर्गा, दुर्गा पूजा, नवरात्रि, नवरात्रे, नवरात्रि, माता की चौकी, देवी जागरण, जगराता, शुक्रवार दुर्गा तथा अष्टमी के शुभ अवसर पर गाये जाने वाला प्रसिद्ध व लोकप्रिय भजन।

अंजनीसुत केसरी नंदन ने (Anjani Sut Kesari Nandan Ne)

अंजनीसुत केसरी नंदन ने,
श्री राम के कारज सारे है,

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