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शबरी सँवारे रास्ता आएंगे राम जी(Shabari Sanware Rastha Aayenge Ram Ji)

शबरी सँवारे रास्ता आएंगे राम जी,

मेरा भी धन्य जीवन बनायेंगे रामजी

आँखों से रोज अपनि राहे बुहारती,

कांटे लगे ना कोई कोमल है राम जी,

शबरी सँवारे रास्ता आएंगे राम जी.....


डलियाँ में बेर बागो से चुन चुन के ला रही,

कलियाँ में बेर बागो से चुन चुन के ला रही,

खट्टे हो चाहे मीठे हो खाएँगे राम जी,

मेरा भी धन्य जीवन बनायेंगे रामजी,

शबरी सँवारे रास्ता आएंगे राम जी.....


आये जब श्री राम जी चरणों में गिर पड़ी,

अंसुअन से धो रही है चरणों को राम जी,

मेरा भी धन्य जीवन बनायेंगे रामजी,

शबरी सँवारे रास्ता आएंगे राम जी.....


सुन्दर बिछा के आसन बैठाया राम को,

दिया कंद मूल लाकर खाए है राम जी,

मेरा भी धन्य जीवन बनायेंगे रामजी,

शबरी सँवारे रास्ता आएंगे राम जी.....

राम भजन - सीताराम सीताराम जपा कर (Sita Ram Japa Kar)

सीताराम सीताराम जपाकर
राम राम राम राम रटा कर

प्रदोष व्रत क्यों रखा जाता है?

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। दरअसल, यह व्रत देवाधिदेव महादेव शिव को ही समर्पित है। प्रदोष व्रत हर माह में दो बार, शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है।

तेरा दरबार हमनें सजाया है माँ(Tera Darbar Humne Sajaya Hai Maa)

तेरा दरबार हमनें सजाया है माँ,
तुमको बुलाया है माँ,

महल को देख डरे सुदामा (Mahal Ko Dekh Dare Sudama)

महल को देख डरे सुदामा
का रे भई मोरी राम मड़ईया