नवीनतम लेख

शिव सन्यासी से मरघट वासी से (Shiv Sanyasi Se Marghat Wasi Se)

शिव सन्यासी से मरघट वासी से,

मैया करूँगी मैं तो ब्याह,

मैं शिव को ध्याऊँगी,

उन्ही को पाऊँगी,

शिव संग करूँगी मैं तो ब्याह,

हाँ शिव संग मैं तो करूँगी ब्याह,

शिव संन्यासी से मरघट वासी से,

मैया करूँगी मैं तो ब्याह ॥


मैना ने समझाया,

वो है समशान का वासी,

तू महलों की रानी,

तू कैसे बनेगी दासी

गौरा तू सोचले सोचले,

कैसे करेगी ब्याह,

शिव संन्यासी से मरघट वासी से,

मैया करूँगी मैं तो ब्याह ॥


बाबा हिमाचल देखो,

सब ऋषियो को ले आए,

सबने मिलकर देखो,

फिर गौरा को समझाए,

औघड़ है योगी है योगी है,

कैसे होगा निबाह,

शिव संन्यासी से मरघट वासी से,

मैया करूँगी मैं तो ब्याह ॥


ना मानी थी गौरा,

वो शिव के ध्यान में लागी,

शिव की याद में सोई,

वो शिव की याद में जागी,

जनम जनम का साथ है साथ है,

जन्मो का रिश्ता,

शिव संन्यासी से मरघट वासी से,

मैया करूँगी मैं तो ब्याह ॥


शिव सन्यासी से मरघट वासी से,

मैया करूँगी मैं तो ब्याह,

मैं शिव को ध्याऊँगी,

उन्ही को पाऊँगी,

शिव संग करूँगी मैं तो ब्याह,

हाँ शिव संग मैं तो करूँगी ब्याह,

शिव संन्यासी से मरघट वासी से,

मैया करूँगी मैं तो ब्याह ॥


गौरी के लाड़ले (Gauri Ke Ladle)

गौरी के लाड़ले,
महिमा तेरी महान,

फाल्गुन शुक्ल आमलकी नाम एकादशी व्रत (Falgun Shukal Aamlaki Naam Ekadashi Vrat)

एक समय अयोध्या नरेश महाराज मान्धाता ने प अपने कुल गुरु महर्षि वसिष्ठ जी से पूछा-भगवन् ! कोई अत्यन्त उत्तम और अनुपम फल देने वाले व्रत के इतिहास का वर्णन कीजिए, जिसके सुनने से मेरा कल्याण हो।

करता है तू बेड़ा पार (Karta Hai Tu Beda Paar)

कोई जब राह ना पाए,
शरण तेरी आए,

आश्विन मास कृष्ण पक्ष की इन्दिरा नाम एकादशी की कथा (Aashvin Maas Krshn Paksh Kee Indira Naam Ekaadashee Kee Katha)

महाराज युधिष्ठिर ने भगवान् कृष्ण से पुनः प्रश्न किया कि भगवन् ! अब आप कृपा कर आश्विन कृष्ण एकादशी का माहात्म्य सुनाइये।