आदियोगी दूर उस आकाश की गहराइयों में (Adiyogi door us aakash ke gaharaiyon mein)

दूर उस आकाश की गहराइयों में,

एक नदी से बह रहे हैं आदियोगी,

शून्य सन्नाटे टपकते जा रहे हैं,

मौन से सब कह रहे हैं आदियोगी,

योग के स्पर्श से अब योगमय करना है तन-मन,

साँस सास्वत सनन सनननन,

प्राण गुंजन धनन धन-धन,

उतरे मुझमे आदियोगी,

योग धारा चलत छण छण,

साँस सास्वत सनन सनननन,

प्राण गुंजन धनन धन-धन,

उतरे मुझमे आदियोगी,

उतरे मुझमे आदियोगी..


पीस दो अस्तित्व मेरा,

और कर दो चूरा चूरा,

पूर्ण होने दो मुझे और,

होने दो अब पूरा पूरा,

भस्म वाली रस्म कर दो आदियोगी,

योग उत्सव रंग भर दो आदियोगी,

बज उठे यह मन सितरी,

झणन झणन झणन झणन झन झन,


साँस सास्वत सनन सनननन,

प्राण गुंजन धनन धन-धन..

साँस सास्वत सनन सनननन,

प्राण गुंजन धनन धन-धन..


साँस सास्वत सनन सनननन,

प्राण गुंजन धनन धन-धन..


साँस सास्वत..

प्राण गुंजन..


उतरे मुझमे आदियोगी,

योग धारा छलक छन छन,

साँस सास्वत सनन सनननन,

प्राण गुंजन धनन धन-धन,

उतरे मुझमे आदियोगी..

उतरे मुझमे आदियोगी..

........................................................................................................
गौरी गणेश मनाऊँ आज सुध लीजे हमारी (Gauri Ganesh Manau Aaj Sudh Lije Hamari)

गौरी गणेश मनाऊँ,
आज सुध लीजे हमारी,

गौरी के लाला हो, मेरे घर आ जाना (Gauri Ke Lala Ho Mere Ghar Aa Jana)

गौरी के लाला हो,
मेरे घर आ जाना,

राम को मांग ले मेरे प्यारे (Ram Ko Maang Le Mere Pyare)

राम को मांग ले मेरे प्यारे
उम्र भर को सहारा मिलेगा

फागुन की रुत फिर से आई, खाटू नगरी चालो (Fagun Ki Rut Phir Se Aayi Khatu Nagri Chalo)

फागुन की रुत फिर से आई,
खाटू नगरी चालो,

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने