चले है भोला, सज धज के - भजन (Chale Hai Bhola Saj Dhaj Ke)

भोला तन पे भस्म लगाये,

मन में गौरा को बसाये,

चले है भोला,

सज धज के,

संखिया मंगल गाती हैं,

भूत प्रेत बाराती हैं ॥


भूत और प्रेत सब,

झूम झूम जाते हैं,

लूले और लँगड़े भी,

डिस्को दिखाते हैं,

भोला मन ही मन मुस्काये,

रूप अजब गजब हैं बनाये,

चले हैं भोला,

सज धज के ॥


पहुँची बारात,

सब मंगल गाते हैं,

देख देख शिव को,

सभी डर जाते हैं,

माता मैना रही घबराये,

शिव ऐसा रूप बनाये,

चले हैं भोला,

सज धज के ॥


मन में ये सोचें शिव,

सब डर जाते हैं,

विवाह कैसे होगा,

कोई पास न आते हैं,

तब सुंदर रूप बनाये,

चन्द्रशेखर नाम कहाये,

चले हैं भोला,

सज धज के ॥


गौरा के संग में,

ब्याह रचाते हैं,

लेके भवानी को,

कैलाश जाते हैं,

‘सूरज सोनी’ हरसाये,

ध्यान शिवजी के चरणों मे लगाए,

चले हैं भोला,

सज धज के ॥


भोला तन पे भस्म लगाये,

मन में गौरा को बसाये,

चले है भोला,

सज धज के,

संखिया मंगल गाती हैं,

भूत प्रेत बाराती हैं ॥


........................................................................................................
चैत्र अमावस्या को क्यों कहते हैं भूतड़ी अमावस्या

चैत्र मास की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह दिन नकारात्मक ऊर्जा, आत्माओं और मृत पूर्वजों से जुड़ा हुआ है।

शंकर का डमरू बाजे रे: शिव भजन (Shankar Ka Damru Baje Re)

शंकर का डमरू बाजे रे,
कैलाशपति शिव नाचे रे ॥

नरक चतुर्दशी 2024: कब है नरक चतुर्दशी? जानें तिथि, पूजा विधि, कथा, महत्व

नरक चतुर्दशी, रूप चौदस या छोटी दिवाली एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो दिवाली के एक दिन पहले मनाया जाता है। यह त्योहार मृत्यु के देवता यमराज को समर्पित है।

काल भैरव के 108 मंत्र

मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव जयंती मनाई जाती है, जिसे कालभैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन काशी के कोतवाल कहे जाने वाले भगवान काल भैरव की पूजा का विधान है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।

यह भी जाने