गणपति के चरणो में, ध्यान लगा ले रे (Ganpati Ke Charno Mein Dhyan Laga Le Re)

गणपति के चरणों में,

ध्यान लगा ले रे,

रिद्धि और सिद्धि,

तुझे सब मिल जाए रे,

गणपति के चरणो में,

ध्यान लगा ले रे ॥


प्रथम पूज्य तुम हो देवा,

करूँ नित्य तेरी सेवा,

मोदक भोग लगाना है,

बप्पा तुम्हे मनाना है,

नाचे और झूमे,

और तुम्हे मनाए रे,

गणपति के चरणो में,

ध्यान लगा ले रे ॥


उत्सव तेरा मनाना है,

अपने घर में लाना है,

फूलो और कलियों से,

मंदिर तेरा सजाना है,

ढोलक और छेणा,

मृदंग बजाए रे,

गणपति के चरणो में,

ध्यान लगा ले रे ॥


गौरा माँ के प्यारे है,

शिव के राज दुलारे है,

इस कलयुग में भक्तो के,

ये ही सच्चे सहारे है,

भव में हो नैया,

यही पार लगाए रे,

गणपति के चरणो में,

ध्यान लगा ले रे ॥


इनकी शरण में आओगे,

सुख सम्रद्धि पाओगे,

भव सागर से तरना है,

इनका दर्शन करना है,

ज़िन्दगी में तेरे,

खुशियाँ भर जाए रे,

गणपति के चरणो में,

ध्यान लगा ले रे ॥


गणपति के चरणों में,

ध्यान लगा ले रे,

रिद्धि और सिद्धि,

तुझे सब मिल जाए रे,

गणपति के चरणो में,

ध्यान लगा ले रे ॥

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जय गणेश जय गजवदन, कृपा सिंधु भगवान (Jai Ganesh Jai Gajvadan Kripa Sindhu Bhagwan)

जय गणेश जय गजवदन,
कृपा सिंधु भगवान ।

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को (Suraj Ki Garmi Se Jalte Hue Tan Ko)

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया। मेरे राम ॥

श्रीकृष्ण लीला: जब बाल कान्हा ने फल वाली अम्मा की झोली हीरे-मोती से भर दी

भगवान अपने भक्तों को कब, कहा, क्या और कितना दे दें यह कोई नहीं जानता। लेकिन भगवान को अपने सभी भक्तों का सदैव ध्यान रहता है। वे कभी भी उन्हें नहीं भूलते। भगवान उनके भले के लिए और कल्याण के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

यशोमती नन्दन बृजबर नागर (Yashomati Nandan Brijwar Nagar)

यशोमती नन्दन बृजबर नागर,
गोकुल रंजन कान्हा,

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