गोरी सुत गणराज पधारो (Gauri Sut Ganraj Padharo)

गौरी सूत गणराज पधारो,

आके सारे काज सवारों,

तुझको आना होगा,

तुझको आना होगा ॥


सारे देवो में पहले तुझको मनाये,

तू ही दयालु सारे विघ्न हटाये,

गिरजा के प्यारे बाबा शिव के दुलारे,

दुखड़ो से आके देवा हमको उबारो,

तुझको आना होगा,

तुझको आना होगा ॥


गोरी सुत गणराज पधारो,

आके सारे काज सवारों,

तुझको आना होगा,

तुझको आना होगा ॥


रिद्धि सिद्धि के दाता आप कहाए,

कृपा दिखाओ दाता गुण तेरे गए,

भक्तो की नैया अब है तेरे सहारे,

अटकी कश्ती को आके पार उतारो,

तुझको आना होगा,

तुझको आना होगा ॥


गोरी सूत गणराज पधारो,

आके सारे काज सवारों,

तुझको आना होगा,

तुझको आना होगा ॥


मलिया गिरी चंदन का टिका लगाऊं,

लड़वन का देवा तेरे भोग लगाऊं,

‘हर्ष’ दीवाना तेरी बाट निहारे,

मेरे भी अटके सारे काज सुधारो,

तुझको आना होगा,

तुझको आना होगा ॥


गौरी सूत गणराज पधारो,

आके सारे काज सवारों,

तुझको आना होगा,

तुझको आना होगा ॥


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शीतला अष्टमी पर शीतला माता की पूजा विधि

शीतला अष्टमी जिसे बसोड़ा भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है।

श्री महालक्ष्मी व्रत कथा

(यह व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आरम्भ करके आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को समापन किया जाता है।)

मेरे नैनों की प्यास बुझा दे

मेरे नैनों की प्यास बुझा दे
माँ, तू मुझे दर्शन दे (माँ, तू मुझे दर्शन दे)

श्री संतोषी माता चालीसा (Shri Santoshi Mata Chalisa)

श्री गणपति पद नाय सिर , धरि हिय शारदा ध्यान ।
सन्तोषी मां की करूँ , कीरति सकल बखान ।

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