Hey Bhole Baba Hey Bhandari (हे भोले बाबा हे भंडारी)

हे भोले बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा,

डमरू वाला दीनदयाला,

डमरू वाला दीनदयाला,

ध्यान धरूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे ध्यान धरूँ तेरा,

हे भोलें बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा ॥


जीवन से तुम दुःख के कांटे,

शंकर अब मिटा दो,

मैं भी हंसना गाना चाहूँ,

सुख के फूल खिला दो,

हे महादेवा हाथ जोड़ के,

हे महादेवा हाथ जोड़ के,

वंदन करूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे वंदन करूँ तेरा,

हे भोलें बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा ॥


मारग से फिरूं भटका भटका,

राह सही दिखला दो,

रस्ता मुश्किल धुंधली मंजिल,

ज्ञान का दीप जला दो,

उमापति महाकाल महेश्वर,

उमापति महाकाल महेश्वर,

दास रहूं तेरा,

ओ शम्भू मेरे दास रहूं तेरा,

हे भोलें बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा ॥


जीवन का आधार तू ही है,

तू ही मेरा सहारा,

प्यारा लगता बाबा मुझको,

चौखट तेरा द्वारा,

गंगाधर मेरे शिव शंकर,

गंगाधर मेरे शिव शंकर,

बालक हूँ मैं तेरा,

ओ शम्भू मेरे बालक हूँ मैं तेरा,

हे भोलें बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा ॥


हे भोले बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा,

डमरू वाला दीनदयाला,

डमरू वाला दीनदयाला,

ध्यान धरूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे ध्यान धरूँ तेरा,

हे भोलें बाबा हे भंडारी,

नाम जपूँ तेरा,

ओ शम्भू मेरे नाम जपूँ तेरा ॥

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गुरु प्रदोष व्रत: शिव मृत्युञ्जय स्तोत्र का पाठ

प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को किया जाता है, जो भगवान शिव को समर्पित तिथि है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मार्गशीर्ष मास में कृष्ण पक्ष के प्रदोष व्रत का वर्णन और महत्व धार्मिक ग्रंथों और पंचांग में बताया गया है।

कब है अखुरथ संकष्टी चतुर्थी

पौष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हर वर्ष अखुरथ संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। दृक पंचांग के अनुसार दिसंबर माह के 18 तारीख को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी।

गलियां जरा सजा दो, महाकाल आ रहे है (Galiyan Jara Saja Do Mahakal Aa Rahe Hai)

गलियां जरा सजा दो,
महाकाल आ रहे है ॥

जिंदगी में हजारों का मेला जुड़ा(Jindagi Me Hajaro Ka Mela Juda)

जिंदगी में हजारों का मेला जुड़ा,
हंस जब-जब उड़ा तब अकेला उड़ा ।

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